
Indore Traders Protest UPI MDR Charge: यूपीआइ आज देश की नियमित और वैध डिजिटल भुगतान व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। लोगों को इसकी आदत लगने के बाद इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाना उचित नहीं होगा। इससे बाजार में लेन-देन प्रभावित हो सकता है और व्यापारी वर्ग के सामने नई आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है। भुगतान पर शुल्क बढ़ने पर व्यापारी उसे ग्राहक आधारित कर देने के लिए मजबूर होंगे, जिससे बाजार में लेन-देन की लागत बढ़ने की आशंका रहेगी। यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस को लेकर व्यापार जगत ने चिंता जताई है।
इंदौर में अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संयुक्त सचिव एवं इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और नकदी आधारित लेन-देन को महंगा करना किसी भी स्थिति में ठीक नहीं है। 2,000 तक के भुगतान रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए पर्याप्त हो सकते हैं, लेकिन कपड़े, किराना, स्कूल फीस, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा, यात्रा और अन्य बड़े भुगतानों में राशि अक्सर इससे अधिक होती है। व्यापारी हर अतिरिक्त लागत अपनी जेब से वहन नहीं कर सकता। यदि यूपीआइ भुगतान पर शुल्क लगता है तो व्यापारी के सामने दो ही रास्ते रहेंगे मार्जिन कम करना या लागत को वस्तु अथवा सेवा की कीमत में शामिल करना। दूसरे विकल्प की स्थिति में इसका भार अंततः ग्राहक पर पड़ सकता है और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस इसके उपयोग को सीमित करेगा। योगेश मेहता, अध्यक्ष एआय एमपी के अनुसार इससे नकद व्यवहार में बढ़ोतरी की आशंका है अतः सरकार को अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और पूरे विश्व में एकमात्र यह यूपीआइ शुद्धतम स्वदेशी विचार से बना हुआ है जिसका उपयोग देश की 100 करोड़ से अधिक जनता कर रही है और इस पर शुल्क लगाना जनता के लिए इसके उपयोग को सीमित करेगा केंद्र सरकार से हम मांग करते हैं कि इस पर पुनर्विचार करें।
आदित्य कासलीवाल, महामंत्री कार डीलर एसोसिएशन के अनुसार यह बिजनेस के हिसाब से ये मुश्किल पैदा करेगा। यूपीआइ कम होगा और बिजनेस पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही विवाद होगे। चार्ज किसी पर भी लगे, वसूला तो उपभोक्ता से ही जाएगा। मारोठिया बाजार के अध्यक्ष विशाल शमी ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को प्रोत्साहित करने के बाद यूपीआइ लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है।
व्यवसायी राजदीप मल्होत्रा के अनुसार सरकार लंबे समय से डिजिटल और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देती रही है। यूपीआइ को व्यापक रूप से अपनाने के बाद आम जनता और व्यापारियों की दैनिक लेन-देन में इस व्यवस्था पर निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में यूपीआइ भुगतान पर मर्चेंट चार्ज लगाने से छोटे एवं मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है।
सराफा बाजार व्यापारी संघ ने भी इसका विरोध किया है। सोना, चांदी, जवाहरात व्यापारिक एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी के अनुसार यह सरासर गलत है, इससे बाजार और बिगड़ जाएगा एवं लोगों में असमंजस की स्थिति बनेगी एवं व्यापारी वर्ग पैसा नहीं ले पाएगा। जीजेसी ने सोने की हॉलमार्किंग शुल्क में 67% वृद्धि को अनुचित बताया।
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक कौंसिल ने सोने की हॉल मार्किंग शुल्क को प्रति आर्टिकल 45 से बढ़ाकर 75 रुपए करने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सरकार तथा भारतीय मानक ब्यूरो से इस निर्णय की तत्काल समीक्षा कर हितधारकों से परामर्श होने तक मौजूदा शुल्क बनाए रखने का आग्रह किया है। राजेश रोकड़े ने कहा कि जीजेसी और आभूषण उद्योग ने लगातार हॉलमार्किंग का समर्थन किया है, क्योंकि शुद्धता आश्वासन और उपभोक्ता विश्वास हमारे व्यापार के मूलभूत तत्व हैं। लेकिन हॉलमार्किंग का समर्थन करने का अर्थ यह नहीं है कि अनिवार्य अनुपालन लागत में लगभग 67% वृद्धि बिना जांच के स्वीकार कर ली जाए। हॉलमार्किंग की मात्रा अत्यधिक बढ़ चुकी है। इसलिए उद्योग को यह समझने का अधिकार है कि इस चरण में प्रति आर्टिकल शुल्क 45 रुपए से 75 रुपए क्यों बढ़ाना आवश्यक है।
नमकीन-मिठाई विक्रेता संघ के अनुराग बोथरा के अनुसार यूपीआइ का नया फैसला परेशानी बढ़ाएगा। हम लोग पहले ही कई तरह के टैक्स देते हैं। यहां तक कि चिल्लर भी लेते हैं। ऐसी स्थिति में कारोबार को सुगम बनाने की बजाय जटिल करना न्यायोचित नहीं है।
यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस को लेकर व्यापारियों और ग्राहकों में नाराजगी अब बाजारों में दिखाई देने लगेगी। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए दुकानों पर विरोध के पोस्टर लगाने की मुहिम शुरू करने का निर्णय लिया है। 18 सितंबर से शहर की विभित्र दुकानों पर मर्चेंट फीस का विरोध' सबंधी पोस्टर लगाए जाएंगे। यह अभियान किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं की चिंता सरकार तक पहुंचाने का शांतिपूर्ण प्रयास है। दुकानों पर लगाए जाने वाले पोस्टरों के माध्यम से ग्राहको को भी इस विषय की गी।