
स्लीप एनीमिया से पीड़ित महिला, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Indore news: रात की नींद अब कई लोगों के लिए सकून के बजाय समस्या बनती जा रही है। शहर में नींद नहीं आने जैसी शिकायतों वाले मरीज की संख्या में लगातार बढ़ रही है। इंदौर का हर पांचवें व्यक्ति को नींद, खर्राटे या स्लीप एपनिया जैसी परेशानी से पीड़ित है। अस्पताल की ओपीडी में हर महीने करीब 50 नए मरीज आ रहे है। चिंता की बात यह है कि बड़े बुजुर्ग तो ठीक असर बच्चों पर भी दिख रहा है और कम उम्र में स्लीप एपनिया के मामले सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो देर रात तक मोबाइल फोन, तनाव और बिगड़ी दिनचर्या की वजह से ये संकट खड़ा हो रहा है। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. संदीप जुल्का के अनुसार उनकी ओपीडी में रोज करीब 5 मरीज ऐसे आते हैं, जिनमें स्लीप से जुड़ी समस्या होती है। इनमें महीने में कम से कम 10 से 15 बच्चे ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) के होते हैं। डॉ. जुल्का ने बताया कि सामान्य तौर पर व्यक्ति को 7 से 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है।
नींद के दो प्रमुख चरण एनआरईएम और आरईएम होते हैं। एनआरईएम के तीसरे चरण में शरीर की रिकवरी और प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं, जबकि आरईएम चरण सीखने और याददाश्त से जुड़ा है। नींद का पैटर्न बिगडऩे पर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्या और संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं, विशेषज्ञ डॉ. भरत रावत ने बताया कि उनकी ओपीडी में महीने में कम से कम 50 मरीज नींद से जुड़ी समस्या को लेकर पहुंचते हैं। उनके अनुमान के मुताबिक सामान्य वयस्क आबादी में करीब 20 से 25 प्रतिशत लोगों को नींद या खर्राटों से जुड़ी परेशानी हो सकती है।
-शाम का भोजन हल्का और जल्दी करें।
-शाम 4 बजे के बाद चाय से बचें।
-नियमित व्यायाम-योग करने, सोने से पहले कमरे में शांति और कम रोशनी रखने की कोशिश करें।
-वजन सामान्य रखें।
-नमक, शुगर, तनाव व स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखें।
विशेषज्ञों के मुताबिक बदलती जीवनशैली के साथ बच्चों में भी स्लीप एपनिया के मामले सामने आ रहे हैं। डॉ. जुल्का ने बताया कि करीब 20 साल पहले 14-15 साल की उम्र में ओएसए के मामले बेहद कम देखने को मिलते थे, जबकि अब उनके पास 7 साल का बच्चा भी ओएसए से पीड़ित है। अधिक वजन, खर्राटे लेना और पेट के बल सोना इसके संकेत हो सकते हैं। मोटापे के कारण बच्चों में फैटी लिवर जैसी समस्या भी देखने को मिल रही है।
डॉ. भरत रावत के अनुसार तेज खर्राटे लेने वालों में स्लीप एपनिया की आशंका हो सकती है। खासकर खर्राटों के दौरान सांस रुकना या घुटन जैसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों से खर्राटों के बारे में पूछने और जरूरत पडऩे पर स्लीप एपनिया की जांच कराने की बात कही है।
विशेषज्ञों के अनुसार तनाव, देर रात तक मोबाइल स्क्रोल करना और अनियमित दिनचर्या नींद के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। बच्चों में देर रात तक पढ़ाई या स्क्रीन के कारण सर्केडियन रिदम प्रभावित होने की बात भी सामने आ रही है। डॉ. जुल्का के अनुसार इसे बिगडऩे से हार्मोनल संतुलन,प्यूबर्टी और मानसिक व ह्रदय स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
Updated on:
17 Sept 2026 02:04 pm
Published on:
17 Sept 2026 02:04 pm
