सर्दी में रहें सावधान, वातावरण में बढ़ी खतरनाक कणों की मात्रा 

साइंस कॉलेज की रिसर्च में खुलासा, सर्दी का सीजन सेहत बनाने के लिए जाना जाता है। लेकिन गिरता तापमान खतरे की घंटी भी बन सकता है।

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Dec 23, 2016
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मयंक साहू@जबलपुर. सर्दी का सीजन सेहत बनाने के लिए जाना जाता है। लेकिन गिरता तापमान खतरे की घंटी भी बन सकता है। जबलपुर की आबो-हवा जहरीली होती जा रही है। पीएम-10 और पीएम-2.5 जैसे पार्टिकल मानव के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बने हुए हैं। अभी तक ये वायुमंडल में उड़कर घुलनशील हो जाते थे वह अब आसमान से जमीन पर टपक रहे हैं। एयर क्वालिटी रिसर्च के दौरान यह बात सामने आई है।

यह है पीएम
पीएम दरअसल पार्टिकुलर मैटर कहलाता है जो रासायनिक, जैविक प्रदूषण से जन्म लेता है। यह आर्गनिक एवं इनआर्गनिक पदार्थों का जटिल मिश्रण हेाता है। यह सांस के द्वारा मानव शरीर के अंदर प्रवेश करते हैं।

यह है कारण
साइंस कॉलेज में एयर क्वालिटी पर रिसर्च कर रहीं रिसर्च स्कॉलर कल्पना सागर के अनुसार नवंबर और दिसंबर के आंकड़ों के अनुसार पीएम 10 और पीएम 2.5 का कंसनटे्रशन स्तर वातावरण में गिरता जा रहा है। ठंड के सीजन में तापमान गिरने से इसकी सांद्रता बढ़ जाती है। वातावरण में वायु की परत नीचे रहने पार्टिकल्स ग्राउंड लेवल पर ही मौजूद रहते हैं।

मानक स्तर
0 से 50 सबसे कम- प्रभाव नहीं
51 से 100 संतोषजनक- सांस लेने में परेशानी
101 से 200 मॉडरेट- अस्थमा, हृदय रोगियों और बच्चों पर प्रभाव
201 से 300 खराब- हृदय रोगियों के लिए घातक
301 से 400 सबसे खराब- सांस की बीमारी के कारण फेफड़ों को नुकसान
401 से 500 खतरनाक- हृदय रोगियों के लिए घातक

यह हैं कारक
तापमान का गिरना, हवा का शांत होना, जगह-जगह खुले में जलाया जाने वाला कचरा, गाडि़यों से निकलने वाला धुआं, जर्जर सड़क से उडऩे वाली डस्ट स्मार्ट सिटी बन रहे जबलपुर को अब स्मार्ट हवा की भी जरूरत है। गिरते तापमान में भी वायु प्रदूषण और बढ़ता जा रहा है। इस पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
डॉ.आरके श्रीवास्तव, प्रोफेसर साइंस कॉलेज
Published on:
23 Dec 2016 07:39 am
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