
जबलपुर. मनमानी पदोन्नति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई पदोन्नति में आरक्षण देने के आरोप में की गई है।
यह आदेश केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने दिया है। कैट के समक्ष कटनी निवासी एएल यादव सहित अन्य की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में बताया गया था कि कटनी निवासी एएल यादव सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि रेलवे में मनमाने तरीके से पदोन्नति में आरक्षण दिया जा रहा है, जो कि अनुचित है। इस मुद्दे पर अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने पक्ष रखा। उन्होने दलील दी कि मनमाने आरक्षण की वजह से सामान्य श्रेणी के याचिकाकर्ताओं का हक मारा जा रहा है। हालत ये है कि अनारक्षित श्रेणी के सामान्य कर्मियों के पदों पर उनसे अपेक्षाकृत कनिष्ठ कर्मियों को आरक्षित आधार पर लाभ प्रदान किया जा रहा है। ऐसे तो ये पदोन्नति पाए लोग गुड्स ड्रायवर से लोको पायलट पैसेंजर ड्रायवर बन जाएंगे।
तीन मार्च, 2020 को रेलवे की ओर से जारी इसी आदेश को याचिका के जरिये चुनौती दी गई है। कैट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद अपने अंतरिम आदेश में साफ किया कि यदि पदोन्नतियों कर दी गई हैं, तो वे विचाराधीन याचिका के अंतिम निर्णय के आधीन होंगी। यदि नहीं हुई हैं, तो न की जाएं। बहस के दौरान साफ किया गया कि रेलवे का रवैया मनमाना है। इससे वास्तविक हकदार पिछड़ जाएंगे। रेलवे की सेवा में सम्मान का भाव पैदा करने के लिए इस तरह की मनमानी का विरोध अत्यावश्यक है। इसीलिए यह कदम उठाया गया। कैट से निवेदन है कि इस मनमानी पर सख्त अंकुश सुनिश्चित करे। इस तर्क से सहमत होकर अंतरिम आदेश और नोटिस जारी किए गए।