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OBC को 27% रिजर्वेशन पूरी तरह संवैधानिक, एमपी के वकील बोले- जनसंख्या ही आरक्षण का आधार

OBC Reservation : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले पर बहस जारी है। ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि, देश और प्रदेश में सभी प्रकार के आरक्षण का मूल आधार जनसंख्या है। आज दोपहर 2:30 बजे से फिर बहस होगी।
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OBC Reservation

OBC Reservation (ओबीसी को 27% आरक्षण पूरी तरह संवैधानिक Photo Source- Patrika)

MP News : जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़े प्रकरणों के मामले में 8वें दिन भी तीखी बहस देखने को मिली। ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि, देश और प्रदेश में सभी प्रकार के आरक्षण का मूल आधार जनसंख्या ही है, क्वांटिफिएबल डाटा नहीं। मामले में अगली नियमित सुनवाई बुधवार दोपहर 2:30 बजे से पुन: आरंभ होगी।

51% आबादी को 27% आरक्षण असमुचित नहीं

ओबीसी पक्ष की ओर से सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने दलील दी कि प्रदेश में 51% ओबीसी आबादी के लिए 27 फीसदी आरक्षण किसी भी दृष्टि से असमुचित प्रतिनिधित्व नहीं है। कोर्ट को बताया गया कि 1953 में गठित काका कालेलकर आयोग और 1979 में गठित मंडल आयोग दोनों ने ही ओबीसी वर्ग की बड़ी आबादी को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने की सिफारिश की थी। 1990 में लागू 27% ओबीसी आरक्षण को ‘इंद्रा साहनी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की पीठ ने भी वैध ठहराया था।

ओबीसी आरक्षण को अलग मानदंड पर परखना ठीक नहीं

सुनवाई के दौरान ये भी कहा गया कि, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण लागू करने से पहले भी इस प्रकार का डेटा एकत्र नहीं किया गया था ऐसे में केवल ओबीसी आरक्षण को अलग मानदंड पर परखना ठीक नहीं है।

ईडब्ल्यूएस और तमिलनाडु का उदाहरण

अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि, जब एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने से पहले सरकारों ने कोई डाटा एकत्रित नहीं किया, तो केवल ओबीसी के मामले में डाटा की बात करना गैर-न्यायिक है। संविधान संशोधन के जरिए वर्टिकल रूप से 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू होने के बाद देश और प्रदेश में कुल आरक्षण 60% तक पहुंच चुका है। तमिलनाडु में भी 1927 से जनसंख्या के अनुपात में ओबीसी आरक्षण लागू है। ऐसे में केवल ओबीसी के 27% आरक्षण को अत्यधिक बताना असंवैधानिक है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इन तर्कों को बेहद गम्भीरता से सुना।

इन्होंने रखा पक्ष

ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह और पुष्पेंद्र कुमार गढ़े ने पैरवी की ओबीसी पक्ष की बहस पूरी होने के बाद राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी।