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100 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ाने का सपना: तीन साल, दर्जनों दावे फिर भी ई-बसें नहीं, सिर्फ इंतजार…

2026 में 20 बसों पर अटकी तैयारी, सरकारी सुस्ती ने योजना पर लगाया ब्रेक, 5 बसें ही सिर्फ पहुंचीं, कठौंदा में चार्जिंग स्टेशन लगभग तैयार, लेकिन रूट और किराया तक तय नहीं, हर बार नई तारीख, जनता के हिस्से सिर्फ वादे
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One hundred e-buses will operate in Jabalpur city

One hundred e-buses will operate in Jabalpur city

जबलपुर. प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना जबलपुर में सरकारी सुस्ती, टेंडर की उलझनों और प्रशासनिक लेटलतीफी की ऐसी कहानी बन गई है, जिसमें समय-सीमा बदलती रही, लेकिन शहर की तस्वीर नहीं…। जिस योजना के तहत 2024 में 100 इलेक्ट्रिक बसें शहर की सडक़ों पर दौडऩी थीं, वह 2026 के मध्य तक भी पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी। अब नगर निगम और जनप्रतिनिधि 15 अगस्त से पहले चरण में 20 बसें चलाने का दावा कर रहे हैं। सवाल यह है कि तीन साल तक आखिर जिम्मेदारी किसकी थी और जवाबदेही कौन तय करेगा।
हालांकि पांच इलेक्ट्रिक बसें जबलपुर पहुंच चुकी हैं और नगर निगम के अफसरों के सुर हैं कि ऑपरेटर ग्रीन सेल मोबिलिटी मुंबई कंपनी का दावा है कि दिसंबर तक सभी 100 बसें चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध करा दी जाएंगी। लेकिन इससे पहले भी कई बार समय-सीमा तय हुई और हर बार नई तारीख दे दी गई। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य शहरों को स्वच्छ, आधुनिक और प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक परिवहन देना था। लेकिन जबलपुर में यह योजना अभी तक ‘ई-बस सेवा’ से ज्यादा ‘ई-बस इंतजार योजना’ बनकर रह गई है।

अबतक नहीं हुआ निर्णय

योजना की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बसें आने के बाद भी रूट और किराया तय नहीं हो पाया है। पहले चरण में सात रूटों पर संचालन की तैयारी की जा रही है, जबकि किराया तय करने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग के पास है। यानी करोड़ों की परियोजना अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद उसकी मूल संचालन व्यवस्था ही अधूरी है।

चार्जिंग स्टेशन हुआ तैयार

कठौंदा में बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन लगभग तैयार है। चार एकड़ भूमि पर विकसित इस स्टेशन में एक साथ 16 बसें चार्ज की जा सकेंगी। नगर निगम का दावा है कि केवल 10 प्रतिशत कार्य शेष है। बसों का संचालन मुंबई की ग्रीन सेल मोबिलिटी कंपनी करेगी और अनुबंध समाप्त होने के बाद भूमि फिर नगर निगम को वापस मिल जाएगी। नगर निगम के अधिकारी यह भी मान रहे हैं कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में ऑपरेटर को आर्थिक नुकसान होगा। अभी शहर में चल रही मेट्रो बसों में औसतन करीब 8 रुपए प्रति किलोमीटर का घाटा हो रहा है। इलेक्ट्रिक बसों में भी लगभग इसी स्तर का नुकसान होने की संभावना है, जिसकी भरपाई परिवहन विभाग करेगा।

योजना एक नजर में

  • 100 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं शहर को।
  • 2024 में शुरू होना था संचालन।
  • 20 बसों का 15 अगस्त से होगा संचालन।
  • 5 बसें जबलपुर पहुंच चुकी हैं।
  • 100 बसें दिसंबर तक चलाने का लक्ष्य।
  • 20-20 बसें हर माह जोडऩे की योजना।
  • 180 किलोमीटर तक एक चार्ज में चलने की क्षमता।
  • 7 रूट पहले चरण में प्रस्तावित।
  • 4 एकड़ भूमि पर विकसित चार्जिंग स्टेशन।

इन रूटों पर संभावित है संचालन

  • रेलवे स्टेशन से भेड़ाघाट
  • आइएसबीटी से तीनपत्ती भेड़ाघाट
  • आइएसबीटी से रांझी
  • स्टेशन से बरगी
  • स्टेशन से पनागर
  • स्टेशन से ग्वारीघाट
  • स्टेशन से पाटन

वर्जन

15 अगस्त से इ-बस सेवा शहर में शुरू करने की तैयारी चल रही है। 5 बसें ऑपरेटर द्वारा मंगा ली गई हैं। 15 बसें जल्द आएंगी। पहले चरण में 20 बसें चलेंगी। चार्जिंग स्टेशन बनकर तैयार हो गया है।

रामप्रकाश अहिरवार, आयुक्त नगर निगम।

वर्जन

सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना है। इस पर हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। शहर से इस साल 100 बसें चलाने का लक्ष्य है। पहले फेज में 20 बसें शुरू हो रही हैं। हर माह 20-20 इ-बसें बढ़ेंगी। इससे शहरवासियों को प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी।

जगतबहादुर सिंह, महापौर।