सीबीएसई स्कूलों में अगले सत्र से नया नियम लागू, छात्रों को होगा ये फायदा
जबलपुर। सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में छात्र-छात्राओं को राजस्थानी, गुजराती, तेलुगु और बंगाली सहित 22 तरह की क्षेत्रीय भाषाएं पढ़ाई जाएंगी। क्षेत्रीय भाषाओं की खूबियां बच्चों को समझाने के लिए सीबीएसई ने ये प्रोजेक्ट शुरू किया है। सभी स्कूलों में भाषा संगम प्रोजेक्ट 30 नवंबर से शुरू होकर 21 दिसंबर तक चलेगा। क्लास में रोजाना विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय भाषा के सामान्य बोलचाल के शब्द बच्चों को सिखाए जाएंगे। ताकि बच्चे दूसरे राज्यों की क्षेत्रीय भाषाओं को समझ और बोल सकें।
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भाषा संगम प्रोजेक्ट में हिन्दी, इंग्लिश के साथ 22 भाषाएं सीखेंगे स्टूडेंट
सीबीएसई ने स्कूलों में शुरू किया भाषा संगम प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद स्कूलों में एसेंबली के दौरान हर दिन अलग-अलग भाषा में स्टूडेंट्स को 5 वाक्य बोलने की प्रैक्टिस करवाई जा रही है। यह पहल मानव संसाधन विभाग के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा की गई है। प्रोजेक्ट एक महीने तक चलेगा। बोर्ड की इस पहल से स्टूडेंट्स कई भाषाएं को जान सकेंगे। अभी तक स्टूडेंट्स सिर्फ हिंदी और इंग्लिश भाषा सीख रहे थे, लेकिन अब वे अन्य भाषाएं भी सीख रहे हैं।
इन भाषाओं को सीखेंगे स्टूडेंट्स
सीबीएसई के अनुसार प्रोजेक्ट के तहत असमी, बंगाली, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथली, मलयालम, मणीपुरी, मराठी, नेपाली, उडिया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलगु, उर्दू आदि भाषाएं अलग-अलग दिन एसेंबली में बुलवाई जाएगी।
इन शब्दों की करेंगे प्रैक्टिस
स्कूलों में हर क्लास के स्टूडेंट्स को भाषा संगम की बुकलेट भी दी गई है। इसमें 22 भाषाओं के कुछ सलेक्टिव शब्दों का अनुवाद है। इस बुकलेट से स्टूडेंट्स को पता चलेगा कि अलग-अलग भाषाओं में वाक्य कैसे लिखे और बोले जाते हैं। स्टूडेंट्स को नमस्कार, आपका नाम क्या है? मेरा नाम लक्ष्मी है, आप कैसे हैं, मैं ठीक हूं आदि पांच वाक्य अलग-अलग भाषाओं में बोलने का अभ्यास करवाया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इसकी लगातार प्रैक्टिस से उनकी पकड़ भाषाओं पर अच्छी हो जाएगी।