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Jabalpur High Court: ट्विशा शर्मा केस में सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित

Giribaba Singh Bail- ट्विशा शर्मा केस में अग्रिम जमानत पर चल रही रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला अहम साबित होगा।
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Giribaba Singh

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Twisha Sharma Case-नोएडा की रहने वाली मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में जमानत पर चल रही रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने का फैसला जबलपुर हाईकोर्ट ने सुरक्षित रख लिया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनी और जमकर बहस भी हुई। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। थोड़ी देर में फैसले की कॉपी बाहर आएगी तब पता चलेगा कि कोर्ट का निर्णय क्या है।

बुधवार को जबलपुर हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति देवनारायण की एकलपीठ में यह सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुरक्षित रख लिया। थोड़ी देर में फैसले की कॉपी बाहर आ सकती है।

कोर्ट ने सुरक्षित रखा आदेश

पीड़ित पक्ष के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को दो मोर्चों पर चुनौती दी गई थी, पहला त्विशा के परिवार की ओर से दायर याचिका के जरिए। दूसरा प्रशासन की ओर से दायर एक याचिका के जरिए। श्रीवास्तव ने कहा कि अब सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली है, इसलिए सीबीआई की ओर से भी एक आवेदन किया गया, जिसमें स्वीकार किया गया है कि यह मामला अब उनके अधिकार क्षेत्र में है और अनुरोध के बाद कार्यवाही में औपचारिक रूप से प्रशासन के साथ सीबीआई का नाम भी शामिल कर लिया गया है। इसके बाद हुई लंबी सुनवाई के दौरान हमने अपना पक्ष रखा और तर्क दिया कि उन्हें अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी। शाम 5.20 बजे तक दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। हमें उम्मीद है कि जल्द ही हमें आदेश प्राप्त होगा और हमें पूरा भरोसा है कि इस मामले में हमें सफलता मिलेगी।

दो याचिकाओं पर सुनवाई

ट्विशा शर्मा के परिवार के वकील अंकुर पांडे ने भोपाल में कहा कि "हाई कोर्ट में ज़मानत के मामलों के संबंध में, आज ज़मानत से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। पहली याचिका इस मामले की एक आरोपी गिरिबाला सिंह से जुड़ी है, जिन्हें निचली अदालत ने सिर्फ़ दो दिनों के भीतर ही अग्रिम ज़मानत का लाभ दे दिया था। आज, राज्य अभियोजन पक्ष और हम दोनों ने ही उस अग्रिम ज़मानत के आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाएँ दायर की हैं। हमने ये कानूनी कार्यवाही इस आधार पर शुरू की है कि कई ऐसे ज़रूरी तथ्य थे जिन्हें निचली सत्र अदालत ने जान-बूझकर नज़रअंदाज़ कर दिया था…"

अब मामला सीबीआई के जिम्मे

नोएडा की रहने वाली ट्विशा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के वकील बेटे समर्थ सिंह के साथ हुई थी। महज चंद माह बाद ही 12 मई 2026 की रात को ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ट्विशा अपने ससुराल के टेरेस पर फंदे से लटकी मिली थी। गिरिबाला और समर्थ सिंह रात को ही एम्स भोपाल लेकर पहुंचे, जहां ट्विशा को मृत घोषित कर दिया गया था। इसके बाद मामला तब उलझा जब गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह पर सबूत नष्ट करने के आरोप लगे। उन्होंने काफी समय न्यायिक अधिकारियों और पुलिस के बड़े अफसरों को फोन लगाकर मामला प्रभावित करने का प्रयास किया। ट्विशा के परिवार और ससुराल पक्ष के आरोप-प्रत्यारोप और लड़ाई में करीब 12 दिन तक ट्विशा का शव एम्स की मार्चुरी में रखा रहा। अब मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है।