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Twisha Sharma case: किरण बेदी ने सास, पति और पुलिस की गलती बताई, ट्विशा शर्मा पर भी उठाया सवाल

Kiran Bedi on Twisha Sharma case- भारत की पहली महिला आईपीएस ऑफिसर किरण बेदी ने ट्विशा शर्मा की सास, पति और पुलिस की सबसे बड़ी गलती बताई है...।

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भोपाल

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Manish Geete

May 26, 2026

kiran bedi on twisha sharma case

देश की पहली आईपीएस ऑफिसर किरण बेदी ने भोपाल के ट्विशा शर्मा केस पर बयान दिया है। (फोटो-पत्रिका)

Twisha Sharma death case: देश की पहली आइपीएस ऑफिसर एवं पुडुचेरी की उपराज्यपाल रही किरण बेदी (kiran bedi) एक बार फिर चर्चाओं में हैं। किरण बेदी ने भोपाल की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में सभी पक्षों की कुछ गलतियों की तरफ ध्यान दिलाया है। बेदी ने कहा कि आरोपी परिवार, पुलिस और ट्विशा शर्मा ने भी कुछ गलतियां की हैं।

ट्विशा की क्या थी गलती?

पूर्व IPS ऑफिसर किरण बेदी ने दिल्ली में मीडिया से ट्विशा शर्मा केस (twisha sharma case) में कुछ बिन्दुओं पर चर्चा की। किरण बेदी ने कहा ट्विशा ने जब परिवार वालों से कहा था कि मुझे यहां से ले जाओ, तो उन्होंने क्या जवाब दिया, यह मुझे नहीं पता। यह तो जांच में सामने आ जाएगा, लेकिन ट्विशा शर्मा ने गलती की है। वो पढ़ी-लिखी थी। उसे यह कहने की आवश्यकता क्यों पड़ी कि मुझे यहां से ले जाओ। वो खुद चली जाती। आपको कौन रोक सकता है? यदि वो कहती कि आरोपी परिवार ने मुझे बंधक बना रखा है, आओ मुझे ले जाओ तब तो यह बड़ी बात बनती है। यदि आप बंधक नहीं थी तो खुद ही जा सकती थीं।

आरोपी परिवार से दो गलती हुई

किरण बेदी ने ANI से बातचीत में कहा कि उनकी नजर में निश्चित से आरोपी परिवार से गलतियां हुई हैं। सबसे पहली गलती यह थी कि घटना के तुरंत बाद ही ट्विशा का पति भाग गया। यदि कोई गलती नहीं हुई तो सामना करना चाहिए थे। सामने आकर कहते कि मैं पुलिस के हर सवालों का जवाब देने को तैयार हूं। दूसरी गलती ट्विशा की सास ने की। उन्होंने बार-बार ऐसे अपमानकारक बयान मीडिया को दिए, जिससे पीड़ित परिवार को बहुत दुख पहुंचा।

क्या दुखों पर नमक छिड़कना चाहिए था?

किरण बेदी ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार पर नमक छिड़कना नहीं चाहिए था। जबकि ऐसे समय में जब वह गहरी पीड़ा के दौर से गुजर रहे हैं। एक सेवानिवृत्त जज के रूप में आपको तो यह कहना चाहिए था कि जब पुलिस आएगी और जो भी सवाल करेगी, हम उन सवालों का जवाब देंगे। हमने घटना की जगह को सुरक्षित कर लिया है। यह दो गलतियां तो आरोपी के परिवार से हुई।

तीसरी गलती पुलिस ने की

किरण बेदी ने कहा कि पुलिस से भी गलती हुई है। कानून में यह प्रावधान है कि जब दहेज हत्या का कोई प्रकरण आता है तो तुरंत ही मर्ग का केस दर्ज होना चाहिए। यदि जांच में आत्महत्या जैसी कोई बात उजागर होती है तो जांच के आधार पर उस प्रकरण में कानून की धाराएं बढ़ाई जा सकती है या हटाई जा सकती हैं।

अपमानकारक बयान न दें

किरण बेदी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट कहा है कि बच्ची के जाने के बाद अपमानकारक टिप्पणी नहीं करना चाहिए। पीड़ित परिवार को भी बयानबाजी से बचना चाहिए। मेरी दृष्टि में सर्वोच्च न्यायालय ने बिल्कुल सही किया है। बेदी ने कहा कि मेरा मानना है कि गिरिबाला सिंह तो अनुभवी जज हैं, वह यह भी कह सकती थी कि जब पुलिस या अदालत सवाल करेगी तो उन सभी प्रश्नों का जवाब वें देंगी। इस प्रकार अपमानकारक बयान नहीं देना चाहिए था।

तलाकशुदा बेटी बेहतर

बेदी ने कहा कि आज के वक्त में माता-पिता के लिए यह बहुत बड़ा संदेश है कि ऐे वक्त अपनी बच्ची को तुरंत बचाएं, क्योंकि तलाकशुदा ही सही, मृत बेटी से बेहतर है। बच्ची जीवित आपके पास रहे। अक्सर ऐसे मामले में माता-पिता कहते हैं कि एडजस्टमेट करो। कई बार बेटियां कहती हैं कि उन्हें थोड़ा समय दो। लेकिन, एडजस्मेंट हो भी सकता है या नहीं भी। ऐसी स्थिति बनते ही अलर्ट हो जाना चाहिए। मेरी नजर में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बिल्कुल सही है कि मृत बेटी से बेहतर तलाकशुदा बेटी का अपने माता-पिता के पास रहना है।