
जबलपुर। पंद्रह माह में चार बार तबादले व व्यवस्था में अनियमितता का आरोप लगाने वाले निलंबित एडीजे आरके श्रीवास ने ७५० किलोमीटर साईकिल यात्रा कर नीमच से जबलपुर पहुंचने के बाद मप्र हाईकोर्ट की मुख्यपीठ के गेट नंबर तीन के सामने एक बार फिर धरना दे दिया है। उन्होंने विरोध स्वरूप मौन व्रत भी धारण किया है। उनके समर्थन में सामाजिक संगठनों के लोग भी धरनास्थल पर मौजूद रहे। गत १ से ३ अगस्त तक इसी तरह धरना देने पर हाईकोर्ट ने उन्हें ८ अगस्त को निलंबित कर दिया था। श्रीवास ने शनिवार को सुबह पूजन-पाठ के बाद से ही अपना मौन व्रत आरंभ कर दिया। वे दो दिन तक मौन होकर धरना देते हुए व्यवस्था में खामियों का विरोध करेंगे। धरने के तीसरे दिन वे मौन व्रत समाप्त करेंगे। उन्होंने पत्रिका के सवालों के जवाब लिख कर दिए।
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निलंबन के बाद की साईकिल यात्रा : श्रीवास ने ८ अगस्त को नीमच जिला अदालत में अपना कार्यभार ग्रहण किया। उसके महज पांच घंटे बाद ही उनके पास निलंबन का आदेश फै क्स के जरिए पहुंच गया। धरने के दौरान राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग संघ जबलपुर के अध्यक्ष संजय सेन, देवेश चौधरी, रामकिशोर शिवहरे, धर्मेंद्र कुशवाहा, बैजनाथ कुशवाहा उपस्थित थे।
लिख कर दिए सवालों के जवाब
सवाल : नीमच से जबलपुर आने में कोई परेशानी?
जवाब : परेशानी तो नहीं, स्वास्थ्य कुछ ख्रराब हुआ। लेकिन जुनून की वजह से यात्रा पूरी कर ली।
सवाल : अभी भी मांगें नहीं मानी गईं तो?
जवाब : भगवान एक रास्ता बंद करता है जो चार रास्ते खोलता है। प्रयास करूंगा। सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊंगा।
सवाल : क्या आपको लगता है कि न्यय मिल पाएगा?
जवाब : शत प्रतिशत, भारतीय न्यायपालिका सभी नागरिकों की आस्था एवं विश्वास का विषय है। कोई संशय नहीं कि मेरे साथ इंसाफ होगा।
सवाल : सुको में खर्च व वक्त अधिक लग सकता है, फिर?
जवाब : मैं स्वयं अपने मामले की पैरवी करूंगा। डर के जीने वालों की नैया पार नहीं होती।
सवाल : आप पर अनुशासनहीनता का आरोप है?
जवाब : महात्मा गांधी ने तो कानून भी तोड़ा था। मैं कानून की राह पर चलकर नियमों का पालन करने का निवेदन कर रहा हूं।