इंटरव्यू- शहर आए भजन गायक रवीन्द्र शर्मा से बातचीत
जबलपुर. ग्वालियर घराने से संबंध है। शिक्षा भी तानसेन की नगरी में पूरी हुई है। 9 साल की उम्र में पहला भजन गाया। उस वक्त मंच का भय भी दूर हुआ। 1991 से प्रोफेशनल भजन गायक के तौर पर गाने की शुरुआत की। 1995 में नर्मदा अष्टक गाया, जिसकी लोकप्रियता वर्तमान में भी है। उनका कहना था शहर आए भजन गायक रवीन्द्र शर्मा का। शहर में वे एक आयोजन में प्रस्तुति देने और मां नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त करने आए हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि संगीत उनके लिए जीवन है, वहीं भजन उनके जीवन का आधार।
संगीत से बदलता है व्यक्तित्व
मैं केन्द्रीय विद्यालय में शिक्षक रहा हैं। नौकरी के दौरान विभिन्न जगहों पर पोस्टिंग रही, जिसके चलते नई भाषाओं को सीखने का मौका भी मिला। मुझे 14 भाषाओं में गीत आते हैं। रवीन्द्र कहते हैं कि संगीत से जीवन बदल सकता है। व्यिक्त्व में बदलाव आता है। मानसिक शांति भी मिलती है। इन दिनों युवा भी भजन गायन से जुड़ रहे हैं। संगीत में भले ही इनोवेशन हो रहा है, लेकिन गायन बेमिसाल गा रहे हैं।
सोशल मीडिया दिला रहा फेम
इंटरनेट के इस दौर में सोशल मीडिया एक बड़ी शक्ति और मंच के रूप में उभरा है। कोई भी कला हो, व्यक्ति उससे जुड़कर खुद की नई पहचान पा रहा है। 27 साल पहले मेरे द्वारा गाए गए नर्मदा अष्टक को अन्य कलाकारों द्वारा भी आवाज दी गई। इससे पुराना नर्मदा अष्टक भी व्यूवर्स की लिस्ट में अपने आप हिट हो रहा है।