OFK Jabalpur- ओएफके जबलपुर में टैंकभेदी बम का निर्माण, रूस पर निर्भरता खत्म
OFK Jabalpur-- जबलपुर की आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) ने स्वदेशी तकनीक से तैयार 125 एमएम एफएसएपीडीएस टैंकभेदी बम का निर्माण कर सप्लाई भारतीय सेना को शुरू कर दी है। 35 करोड़ की पहली खेप सेना को भेजी गई है। यह 'मैंगो प्रोजेक्ट' के तहत रूस के सहयोग से शुरू हुआ था। इसे अब पूरी तरह स्वदेशी रूप दे दिया गया है। यह अत्याधुनिक टैंकभेदी बम दुश्मन के आधुनिक टैंकों को भेदकर भीतर विस्फोट करने में सक्षम है। इसका तीन चरणों में विकास किया गया है। रक्षा कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड की इकाई ओएफके ने बम का हायर पेनीट्रेशन वर्जन भी विकसित किया है, जिससे इसकी मारक क्षमता और बढ़ गई है। खास बात यह है कि बम 530 एमएम या उससे अधिक मोटाई वाली आर्मर्ड प्लेट को भी आसानी से भेद सकता है। बम के निर्माण से जहां रूस पर निर्भरता खत्म होगी वहीं राष्ट्रीय मुद्रा भी बचेगी।
खमरिया आयुध निर्माणी OFK Jabalpur की ओर से पिछले वित्तीय वर्ष में किए गए कुल उत्पादन में इस का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अब तक सेना को भेजी गई खेप की कीमत लगभग 35 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
टेंकभेदी बम का तीन चरणों में विकसित किया गया। शुरुआत में रूस से बम आयात किए गए। इसके बाद सेमी नॉक्ड डाउन (एसकेडी) और कम्पलीट नॉक्ड डाउन (सीकेडी) वर्जन पर काम किया गया। अंतिम चरण में स्वदेशी (इंडीजीनियस) रूप में तैयार किया गया। इस परियोजना में आयुध निर्माणी भंडारा (महाराष्ट्र) और तिर्ची का सहयोग लिया गया। जबलपुर OFK Jabalpur की खमरिया की फैक्ट्री में इसके लिए दो प्लांट स्थापित किए गए।
बालासोर में ट्रायल सूत्रों के अनुसार, ओडिशा के बालासोर में स्वदेशी बम का सफल परीक्षण हो चुका है। सेना को नियमित रूप से आपूर्ति की जा रही है। आने वाले समय में उत्पादन लक्ष्य 400 से 500 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। पहले भारत को इस प्रकार के बम रूस से आयात करने पड़ते थे।
रक्षा मामलों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में जबलपुर की खमरिया आयुध निर्मार्णी ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। टैंकरोधी बम के निर्माण से जहां रूस पर निर्भरता खत्म होगी वहीं करोड़ों रुपए की राष्ट्रीय मुद्रा भी बचेगी।