सावन में शिव पूजा का लग सकता है दोष, ये बन रहे कारण
जबलपुर। सोमवार के दिन शिवपूजा का विधान है। भोलेनाथ एक लोटे जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना की पूर्ति होती है। ज्योतिषाचार्य सचिनदेव महाराज के अनुसार यदि भोलेनाथ की पूजा शिवमंत्र के साथ की जाए तो भाग्योदय के साथ रोजगार , उन्नति व मनचाहे जीवनसाथी पाने की मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है।
सोमवार के दिन एक समय रात्रि में भोजन का व्रत संकल्प लें। सबसे पहले सुबह शीघ्र उठकर स्नानदि कार्यों से निवृत होकर शिवालय जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें। जलाभिषेक के समय नीचे लिखे शिव मंत्र का उच्चारण करें। नीचे लिखे उपायों को करते समय भी शिवमंत्र का संमरण करते रहें।
ऊँ महाशिवाय सोमाय नमः।
शिवलिंग पर जलाभिषेक के बाद गाय का दूध अर्पित करें। इससे तन, मन अौर धन संबंधी हर समस्या दूर होती है।
शिवलिंग पर शहद की धारा अर्पित करें। इससे आजीविका. नौकरी व व्यवसाय से संबंधित सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें अौर लाल चंदन लगाएं व श्रृंगार करें। माना जाता है कि शिवलिंग पर चंदन लगाने से जीवन में सुख-शांति आती है।
इन उपायों के बाद यथाशक्ति गंध, अक्षत, फूल, नैवेद्य अर्पित कर शिव आरती करें। साथ ही शिव जी को अर्पित किए गए दूध, शहद को चरणामृत के रूप में ग्रहण करें और चंदन लगाकर मनोकामना पूर्ति हेतु भोलेनाथ से प्रार्थना करें।
शिव पूजा देव दोष से बचें
हिन्दू पंचांग के मुताबिक ये दिन शिव-शक्ति या गणेश उपासना के खास दिन है. बेल वृक्ष में शिव शक्ति स्वरूपा देवी लक्ष्मी का वास माना गया है और शिव-शक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे माने गए हैं. श्रीगणेश भी शिव-शक्ति के पुत्र हैं. इसलिए बताया गया है कि अनजाने में यहां बताए जा रहे दिनों में बेलपत न तोड़कर शिव पूजा देव दोष से बचना चाहिए.
शास्त्रों के मुताबिक इन तिथियों या दिनों पर बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए - - चतुर्थी.. - अष्टमी.. - नवमी.. - चतुर्दशी.. - अमावस्या.. - संक्रांति (सूर्य का राशि बदल दूसरी राशि में प्रवेश) - सोमवार
बेलपत्र न होने की स्थिति में शिव पूजा में ये उपाय करना चाहिए - चूंकि बेलपत्र शिव पूजा का अहम अंग है, इसलिए इन दिनों में बेलपत्र न तोडऩे के नियम के कारण बेलपत्र न होने पर नए बेलपत्रों की जगह पर पुराने बेलपत्रों को जल से पवित्र कर शिव पर चढ़ाए जा सकते हैं या इन तिथियों के पहले तोड़ा बेलपत्र चढ़ाएं.