शहर आए वीगन एक्टिविस्ट डेविड एंड्रयूज और एनी लेनकी
जबलपुर. जानवरों को बचाने और उनके संरक्षण के लिए जरूरी है कि लोगों का शाकाहारी होना। लोग अपने फायदे के लिए जानवरों को मार रहे हैं, जिससे लैदर और दूसरी चीजें बनाकर वे पैसा कमा रहे हैं। इसका सीधा कारण है कि लोगों के बीच इन सभी चीजों की डिमांड है। यदि लोग इन सभी चीजों की डिमांड बंद कर दें तो जानवरों पर अत्याचार भी बंद हो जाएगा। यह कहना था वीगन एक्टिविस्ट डेविड एन्ड्रयूज और एनी लेनकी का। रोटरी आहूजा हॉल में वीगन एक्टिविस्ट ग्रुप के द्वारा कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें लोगों को शाकाहारी जीवन अपनाने की कोशिश में जुटे डेविड और एनी ने कई मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान वर्कशॉप और सेमिनार भी आयोजित हुए, जिसमें उन्होंने जानवरों की स्थिति और परेशानी पर बात कही। उन्होंने बताया कि किस तरह के नॉन वेज और दूध का सब्सीट्यूट बादाम, चना और सोयाबीन बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को शाकाहारी बनने के लिए इस मोटिवेशन जर्नी के साथ वे 11 देशों की विजिट कर चुके हैं।
हम सिर्फ जागरूक कर सकते हैं
इंग्लैंड के रहने वाले वीगन एक्टिविस्ट डेविड ने बताया कि वीगनिज्म लाइफ अपनाने के लिए वे लोगों को सिर्फ अवेयर करते हैं, क्योंकि इस लाइफ को अपनाना लोगों के नजरिए पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि जब वे 19 साल के थे, तब गाय का दूध पीने के कारण उनके पेट में किसी तरह की गड़बड़ी आ गई थी। इस बात को उन्होंने अपने नजरिए से समझा कि गाय का दूध को बछड़े के लिए होता है वह तो इंसान हैं। इसके बाद उन्होंने जीवन को पूरी तरह से वीगन पैटर्न पर अपना लिया। वे कहते हैं व्यापार के नाम से जानवरों पर अत्याचार होते हैं। गायों को जबरन मां बनाया जाता है, ताकि वह साल भर दूध सकें।
हेल्दी रहने के लिए दूध जरूरी नहीं
यूरोप की रहने वाली एनी लेनकी ने बातचीत में बताया कि बचपन से ही उन्होंने वीगन लाइफ अपना ली थी। वे कहती हैं टेस्ट के लिए जानवरों को मारना गलत है। यह लोगों की डिमांड ही है, जिसके कारण जानवरों को भी लोगों ने व्यापार का जरिया बना लिया है।