
Chhattisgarh Politics: झीरम घाटी नरसंहार पर एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को राजीव भवन में प्रेसवार्ता कर कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए इसे ‘आधा-अधूरा न्याय’ बताया। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से ही राजनीतिक साजिश के पहलू पर केंद्रित नहीं रही।
कांग्रेस का कहना है कि अदालत ने उन्हीं तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया, जिन्हें एनआईए ने जांच के दौरान सामने रखा था, लेकिन असली साजिश अब भी अनसुलझी है। सुशील मौर्य ने कहा कि झीरम में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कोई सामान्य नक्सली वार नहीं था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी? यात्रा का मार्ग किसके कहने पर और क्यों बदला गया? हमले की योजना किसने तैयार की? कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इन सवालों का जवाब जांच में सामने नहीं आया। कांग्रेस ने एनआईए की शुरुआती जांच और बाद की चार्जशीट में नामों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए।
मौर्य ने कहा कि शुरुआती एफआईआर में गणपति और रमन्ना जैसे बड़े नक्सली नेताओं के नाम शामिल थे। 21 मार्च 2014 को गणपति और रमन्ना समेत 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी हुआ था। अगस्त 2014 तक नाम मौजूद थे, लेकिन बाद की चार्जशीट में इन नामों के हटने पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। प्रेसवार्ता में ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला, नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी, महिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष लता निषाद, ब्लॉक अध्यक्ष संतोष सेठिया, महामंत्री नीतीश शर्मा, कोषाध्यक्ष रविशंकर तिवारी, लखेश्वर कश्यप, किसान कांग्रेस अध्यक्ष दयाराम कश्यप, मीडिया प्रभारी शादाब अहमद, एस. नीला, खीरेंद्र यादव सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के समय से ही झीरम मामले की जांच को प्रभावित किया गया। मौर्य ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जब छत्तीसगढ़ पुलिस की एसआईटी बनाई तो एनआईए ने जांच रोकने के लिए कानूनी रास्ता अपनाया। सुप्रीम कोर्ट के एसआईटी के पक्ष में फैसला आने के बावजूद राज्य सरकार ने लंबे समय तक जांच शुरू नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का पूरा सच सामने आए।