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झीरम घाटी हमले में 13 साल बाद फैसला, NIA कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को माना दोषी, 16 सितंबर को सजा

Jhiram attack: झीरम घाटी हमले में 13 साल बाद NIA कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी माना। 101 गवाहों की गवाही के बाद अब 16 सितंबर को सजा का ऐलान होगा।
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जगदलपुर

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Updated: 6 Sep 2026, 8:41 AM IST

Jhiram Ghati

झीरम केस का 185 पन्नों का फैसला (Photo Source- Patrika Create)

Jhiram Ghati Attack: प्रदेश के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में शनिवार को जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में सभी 10 आरोपियों को विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों के हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराओं में दोषी पाया। अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और करीब 101 गवाहों के बयानों को महत्वपूर्ण माना। अब इन दोषियों की सजा पर 16 सितंबर को फैसला सुनाया जाएगा।

101 गवाहों की गवाही के बाद 10 आरोपियों को दोषी ठहराया

अदालत में अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों की गवाही के बाद 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। मामले में कुल 41 आरोपियों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। गिरफ्तार आरोपियों में से एक की मृत्यु हो चुकी है और वर्तमान में 10 आरोपियों के खिलाफ विचारण चल रहा था। उल्लेखनीय है कि मामले की सुनवाई 13 साल तक चली है। इस हमले में कांग्रेस के बड़े नेता विद्याचरण शुक्ल, नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार, गोपी माधवानी समेत 27 लोगों की बेहरहमी से हत्या कर दी गई थी।

25 मई 2013… जब झीरम घाटी में गूंजी थीं गोलियां

25 मई 2013 की शाम बस्तर के इतिहास में कभी न भूलने वाली तारीख बन गई। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा दरभा क्षेत्र के झीरम घाटी से गुजर रही थी। नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया। यह हमला केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति को झकझोर देने वाली घटना बन गया। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की मौत ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया था।

किस आरोपी की क्या भूमिका रही

  • -प्रमिला मोडियम उर्फ ज्योति : सैन्य कंपनी नंबर-2 के सदस्यों के साथ हमले में शामिल थी-चैतू लेकाम : पीएलजीए सेक्शन कमांडर था, विस्फोटक और फोरेंसिक साक्ष्य मिले-सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
  • -मुक्का मंडावी: हथियार के साथ हमले में शामिल हुआ, पुलिसकर्मियों के हथियार छीने।-कवासी कोसा : झीरम हमले में शामिल हुआ, पुलिसकर्मियों के हथियार लूटे।-आयता मडकम : कोलेंग और कंडानार से सामग्री जुटाकर झीरम तक पहुंचाई।-मडक़म देवा- दरभा डिवीजन कमेटी का सदस्य, हमले के लिए सहायता उपलब्ध कराई।-जोगा मडक़मी-बंजामी सना: दरभा डिवीजन कमेटी की सदस्य, फंड के लिए वसूली का भी आरोप।-महादेव नाग: घटनास्थल पर मौजूदगी और हमले में भूमिका थी।

नक्सलियों ने इसलिए चुनी थी झीरम घाटी

कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान नक्सलियों ने इस पूरे रूट के सबसे अटैकिंग और अपने लिए सेफ इलाके को चुना था। झीरम एक तरफ छोटी पहाडिय़ों तो दूसरी तरफ गहरी खाइयों वाला इलाका है। इसके पीछे जंगलों और नक्सलियों के आधार वाला लंबा इलाका था। इसलिए वे पिछले 2 हफ्ते से यहां हमले की लगातार तैयारी कर रहे थे। एक ओर पहाड़ी और दूसरी तरफ खाई के चलते यहां एंबूश लगाना बेहद आसान था। वहीं एंबूश में फंसने के दौरान सामने वाले का भागना भी लगभग नामुनकिन था। इसके अलावा यहां से सबसे करीब दरभा थाना भी 17 किमी दूर था। ऐसे में नक्सलियों ने अपने सबसे सेफ इलाके झीरम को इस सबसे बड़ी घटना के लिए चुना था।

अरविंद चौधरी बचाव पक्ष के वकील ने कहा

अरविंद चौधरी बचाव पक्ष के वकील ने कहा अदालत ने सभी 10 लोगों को दोषी माना है। सजा पर फैसला 16 सितंबर को होगा। फैसले की कॉपी मिलने के बाद उसका परीक्षण कर हाईकोर्ट का रूख किया जाएगा।

एनआईए वकील ने कहा

एनआईए वकील दिनेश पानीग्राही ने कहा झीरम हमले में अदालत ने सभी 10 लोगों को दोषी माना है। हमने अपना पक्ष न्यायालय के सामने मजबूती से रखा हैं, इसकी सजा पर 16 सितंबर को फैसला आएगा।

भूपेश बघेल बोले-यह अधूरा न्याय है

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा झीरम कांड में अदालत के फ़ैसले से लगता है कि यह अधूरा न्याय है। निचले कैडर के सिर्फ 10 नक्सलियों को सज़ा मिलने को न्याय नहीं कहा जा सकता। एनआईए ने ख़ुद ही कहा है कि इस घटना को 200 से अधिक लोगों ने अंजाम दिया था। जांच में लापरवाही बरत रही एनआईए 10 से अधिक लोगों को पकड़ ही नहीं पाई। एनआईए ने नक्सलियों के शीर्ष नेताओं के नाम तो पहले ही एफ़आईआर से हटा दिए थे। जांच आयोग ने सिर्फ ‘सुरक्षा व्यवस्था में कमी’ को लेकर जांच की है न कि आपराधिक मामले में सज़ा दिलाने के लिए। सच यही है कि झीरम के पीछे रचे गए भयानक राजनीतिक षडयंत्र की जांच आज तक नहीं हुई है।

गृहमंत्री का बयान

गृहमंत्री विजय शर्मा ने कह 5 साल कांग्रेस की सरकार थी, कुछ क्यों नहीं किया। झीरम मामले में एनआईए की जांच सही साबित हुई तभी कोर्ट ने सजा दी है। एनआईए को जब जांच सौंपी गई तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी।