
जयपुर. सामोद. सफेद चंदन की बागवानी में नवाचार कर सामोद निवासी एमबीए पास अनिल धाबाई ने मिसाल पेश की है। कुछ अलग करने की चाहत के चलते उन्होंने बागवानी करने की ठानी। इसके चलते अनिल ने निजी कंपनी की नौकरी छोड़ दी। हर कोई उनका मजाक बनाने लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मजाक को अपनी ताकत बनाया। इसके बाद अनिल कृषि सेमिनारों में जाने लगे। इस दौरान एक सेमिनार में विदेशी कृषि वैज्ञानिकों ने सफेद चंदन की बागवानी से लाखों रुपए कमाने की तकनीक बताई।
नई तकनीक होने से रिस्क अधिक थी। इस कारण बेंगलूरु जाकर प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2016 में पहली बार अबोहर से सफेद चंदन के 200 पौधे लाए और अपने खेत पर लगाए, लेकिन मात्र तीन पौधे ही जीवित बचे। उन्होंने फिर से पौधों को लगाने व रख-रखाव का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद सफेद चंदन के 400 पौधे लगाए। पौधों में जैविक खाद डाली और बच्चों की तरह देखभाल की। अब अधिकांश पौधे आकार लेने लगे हैं। अनिल की सफलता देख क्षेत्र के अन्य किसान भी सफेद चंदन की बागवानी करने लगे हैं। उपखंड में अन्य किसानों के खेतों में 10 हजार से अधिक सफेद चंदन के पेड़ महक बिखेर रहे हैं।
विदेशी बाजार में विशेष मांग
अनिल ने बताया कि चंदन के पेड़ को तैयार होने में 15 साल का समय लगता है। राष्ट्रीय व विदेशी बाजार में इसकी विशेष मांग है। पेड़ के पत्ते, टहनियां, छाल, लकड़ी, जड़ सभी की अच्छी कीमत मिलती है। इसके इत्र की खाड़ी देशों में अधिक मांग है। इसके अलावा चंदन की लकड़ी फर्नीचर, सौन्दर्य प्रसाधन, अगरबत्ती, हवन आदि में काम आती है। उन्होंने बताया कि चंदन की बागवानी के लिए यहां की जलवायु अनुकूल है। अनिल अब किसानों को जागरूक कर रहे हैं। अब तक 10 हजार किसानों को प्रशिक्षण दे चुके हैं।