शहर में घरों से कचरा उठाने के नाम पर खेल हो रहा है। निगम भले ही कचरा साफ नहीं कर पा रहा हो, लेकिन घर-घर कचरा संग्रहण के नाम पर दोनों शहरी सरकारें सालाना करोड़ों रुपए लुटा रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक दोनों नगर निगम करीब पांच करोड़ रुपए हर माह कचरा उठाने के […]
शहर में घरों से कचरा उठाने के नाम पर खेल हो रहा है। निगम भले ही कचरा साफ नहीं कर पा रहा हो, लेकिन घर-घर कचरा संग्रहण के नाम पर दोनों शहरी सरकारें सालाना करोड़ों रुपए लुटा रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक दोनों नगर निगम करीब पांच करोड़ रुपए हर माह कचरा उठाने के नाम पर खर्च करते हैं। हैरिटेज नगर निगम ने नए टेंडर भी किए हैं। इनमें एक हूपर प्रति माह कचरा उठाएगा तो उसे निगम करीब 52 से 54 हजार रुपए का भुगतान करेगा। इसके अलावा तीन जोन में निगम अपने हूपर चलवाएगा। इसके लिए किराया 46 हजार रुपए तय किया गया है। वहीं ग्रेटर नगर निगम में 75 हजार से लेकर एक लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है।
हैरिटेज: अब यूजर चार्ज अनिवार्य
-हैरिटेज नगर निगम ने जो नए टेंडर किए हैं, इनमें यूजर चार्ज वसूली को अनिवार्य किया है। हैरिटेज निगम में पहली बार सीएनजी से 600 हूपर संचालित होंगे।
-व्यापारियों से लेकर वे मकान जो यूजर चार्ज के दायरे में आएंगे। उन सभी से यूजर चार्ज लिया जाएगा।
ग्रेटर में एक हूपर की ये दर
-झोटवाड़ा, जगतपुरा, सांगानेर और विद्याधर नगर में प्रति हूपर 75 हजार रुपए औसतन किराया दिया जा रहा है। इनको गैराज शाखा संचालित कर रही है।
-मालवीय नगर, मुरलीपुरा और मानसरोवर में 80 हजार से एक लाख रुपए प्रति हूपर का किराया ग्रेटर निगम दे रहा है।
हालातों में नहीं सुधार
स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम शहर में हैं। अभी ग्रेटर नगर निगम क्षेत्र में निरीक्षण किया जा रहा है। इसके बाद भी सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है। हूपर पर नियमित रूप से हेल्पर नहीं आ रहे। अब तक गीला-सूखा कचरा 10 फीसदी हूपरों में नहीं हो रहा है। शहर में करीब 600 हूपरों का संचालन हो रहा है।