
धारवाड़. आषाढ़ मास के पावन अवसर पर पतंजलि के तत्वावधान में धारवाड़ के हेब्बल्ली रोड गाली ओणी स्थित प्रसिद्ध मुदि मारुति मंदिर के सामुदायिक भवन योग केंद्र में विशेष अग्निहोत्र अनुष्ठान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक चेतना, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ अग्निहोत्र को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
Bविश्वभर में योग का विस्तारB
योग गुरु एवं पतंजलि योगपीठ कर्नाटक के मुख्य राज्य प्रभारी भंवरलाल आर्य ने अनुष्ठान का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि कुछ दशक पहले योग आम लोगों की पहुंच से दूर माना जाता था, लेकिन आज विश्वभर में योग का विस्तार हो चुका है। इसी प्रकार अग्निहोत्र को भी प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसे बिना किसी जाति, धर्म या भेदभाव के कोई भी सीख सकता है। आर्य ने अग्निहोत्र के पारंपरिक और पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए औषधीय जड़ी-बूटियों, गाय के घी और उपलों से किए जाने वाले अनुष्ठान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अग्निहोत्र की भस्म का उपयोग कृषि में भी किया जाता है और इसके माध्यम से प्रकृति तथा समाज के प्रति सकारात्मक सोच विकसित की जा सकती है।
Bअग्निहोत्र भी हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्साB
उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की प्राचीन भारतीय परंपरा की तरह अग्निहोत्र भी हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों लोगों को इसके प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। कार्यक्रम में हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम उप महापौर रत्नाबाई नाजरे, पार्षद दीपा नीरलकट्टी, मुदि मारुति मंदिर समिति के रवि एलिगार, वासु एलिगार, मंगेश महेंद्रकर, वसंतराव लक्कुंडे तथा पतंजलि परिवार से विजयलक्ष्मी नवले, उमा अगड़ी, रमेश सुलाखे, लीलावती सांब्राणी, शैलजा मडिकर, वस्त्रदमुठ, सविता शिंदे, सुवर्णा करिंडी, चव्हाण, बसवराज मुम्मिगट्टी, प्रेमा मुम्मिगट्टी, नीलकंठ होरडी, उमेश कुलकर्णी, भाग्यश्री बडिगेर, पुष्पा यरेगौडर, विजयलक्ष्मी करिंडी, वंदना ओंकार, पवाड़ शेट्टी और वीरेश सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।