
डाॅ आशीष शर्मा/जयपुर। प्रदेश में कृषि में जल्द ही एक ओर नवाचार शुरू होने जा रहा है। साउथ आस्ट्रेलिया के सहयोग से राज्य में शुरू होने जा रहे इस नवाचार के जरिए टमाटर के एक पौधे से 67 किलो तक टमाटर उगाया जा सकेगा। अभी टमाटर की परंपरागत खेती में एक पौधे से आधा किलो या इससे कुछ अधिक तक ही टमाटर उगाया जा रहा है। इस तकनीक से टमाटर के साथ ही खीरा और कलरफूल शिमला मिर्च का भी मौजूदा से कई अधिक उत्पादन किया जा सकेगा। इस नवाचार टमाटर के महंगा होकर घरेलू के खाने पीने का बजट बिगाडऩे जैसी समस्या से भी काफी हद तक निजात मिल सकेगी। एक पौधे से अच्छी संख्या में टमाटर और अन्य की खेती हाइड्रोपोनिक तकनीक के नवीनतम तकनीक से संभव हो सकेगी।
दरअसल, कृषि विभाग साउथ आस्ट्रेलिया की एक कंपनी के साथ जल्द ही एमओयू करने जा रहा है। इस एमओयू के बाद जयपुर के बस्सी में ढिंढोल स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी पर हाइड्रोपोनिक तकनीक से टमाटर, खीरे और शिमला मिर्च की अधिक उत्पादन वाली खेती शुरू हो सकेगी। साउथ आस्ट्रेलिया से आयरन वूड कंपनी से आए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने कृषि मंत्री डॉ प्रभुलाल सैनी के साथ मुलाकात की है। इस मुलाकात में कृषि आयुक्त विकास सीताराम भाले भी मौजूद रहे हैं। दल की ओर से नई तकनीक से ढिंढोल सेंटर पर हाइड्रोपोनिक खेती को कृषि मंत्री सैनी ने अपनी सैद्धांतिक सहमति भी दे दी है। राजस्थान ऑलिव कल्टीवेशन लिमिटेड इस नई तकनीक के जरिए कंपनी की सहायता से यह खेती करेगा।
जलवाष्प से होगी खेती
सामान्यतया परंपरागत खेती में टमाटर के पौधे को मिट्टी में लगाया जाता है। इस खेती में एक पौधे से आधा किलो तक टमाटर प्राप्त किए जा सकते हैं। लेकिन हाइड्रोपोनिक की इस नई तकनीक में पानी के पाइप में पोषण युक्त जलवाष्प की प्रेशर युक्त नमी से टमाटर के पौधे को सींचा जाएगा। इस तकनीक में पानी का उपयोग काफी कम होगा। बिना मिट्टी के यह खेती होगा।
दो महीने बाद ही टमाटर
इस तकनीक में लगाए जाने वाले पौधे में 60 दिन बाद टमाटर आना शुरू हो जाएंगे। दल के सदस्यों ने दावा किया है कि इस तकनीक के जरिए एक टमाटर के पौधे से 67 किलो तक टमाटर लगातार आठ महीने तक प्राप्त किए जा सकेंगे। शिमला मिर्च और खीरा भी सामान्य खेती की तुलना में कई गुना अधिक पैदा किया जा सकेगा। एमओयू के बाद इस तकनीक से पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी में खेती की जाएगी और फिर इसे आगे बढ़ावा भी दिया जाएगा। अभी सेंटर पर हाइड्रोपोनिक की जिस तकनीक से टमाटर की खेती की जा रही है उसमें एक पौधे से आठ से 10 किलो तक ही टमाटर प्राप्त किए जा रहे हैं।