राज्यसभा उम्मीदवार घोषित होते ही डॉ अलका गुर्जर की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उनके बयान को केवल धन्यवाद संदेश नहीं, बल्कि राजस्थान की राजनीति में उनकी नई भूमिका और भाजपा की बड़ी रणनीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। आखिर उम्मीदवार बनने के बाद अलका गुर्जर ने क्या कहा, जिसने संगठन में लंबा सफर तय कर अब संसद के ऊपरी सदन पहुंचने की दहलीज पर कदम रख दिया है।

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पार्टी की राष्ट्रीय सचिव डॉ अलका गुर्जर की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उम्मीदवार बनाए जाने पर उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास व्यक्त किया है, उस पर वह पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ खरा उतरने का प्रयास करेंगी। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो दायित्व सौंपा है उसको पूरा करने के लिए वह प्राण लगा देंगी।
डॉ अलका गुर्जर ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा संसदीय बोर्ड, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय नेतृत्व, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और पार्टी कार्यकर्ताओं की आभारी हैं। उन्होंने कहा कि संगठन ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वह पूरी मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ निभाएंगी। उनका लक्ष्य विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने के साथ-साथ राजस्थान के विकास में भी सक्रिय योगदान देना रहेगा।
अलका गुर्जर ने कहा कि भाजपा एक विचारधारा आधारित संगठन है, जहां व्यक्ति से अधिक संगठन और राष्ट्रहित को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा समाज के अंतिम छोर पर खड़े, वंचित और शोषित वर्ग के उत्थान के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में निरंतर सीखने की प्रक्रिया चलती रहती है और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन से उन्हें हमेशा नई प्रेरणा मिली है। विकसित भारत और विकसित राजस्थान के संकल्प को साकार करने में वह अपनी पूरी क्षमता से योगदान देंगी।
राज्यसभा उम्मीदवार घोषित होने के बाद अलका गुर्जर का बयान ऐसे समय आया है, जब भाजपा ने राजस्थान में राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को साधने के उद्देश्य से उन्हें राज्यसभा के लिए चुना है। पार्टी के इस फैसले को महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने और पूर्वी राजस्थान में गुर्जर समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि अलका गुर्जर का चयन कभी राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के लिए भी हुआ था। उन्होंने प्रशिक्षण पूरा कर लिया था, लेकिन सरकारी सेवा में शामिल होने के बजाय राजनीति का रास्ता चुना। यही निर्णय आगे चलकर उन्हें भाजपा संगठन के राष्ट्रीय स्तर तक ले गया। उनके पति डॉ नाथू सिंह गुर्जर भी भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में इस परिवार की लंबे समय से सक्रिय भूमिका रही है।
राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनके लिए 18 जून को मतदान होगा और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। भाजपा ने इस चुनाव के लिए डॉ अलका गुर्जर के साथ वरिष्ठ नेता डॉ सतीश पूनिया को भी उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस फैसले के दूरगामी प्रभावों पर चर्चा शुरू हो गई है।