
जयपुर। राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने असम में किए गए नागरिकों के राष्ट्रीय पंजीयन (एनआरसी) का समर्थन करते हुए कहा कि देशद्रोहियों को खदेडऩे के लिए देश के सभी राज्यों को इसे लागू करना चाहिए।
कटारिया ने मंगलवार काे यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि असम में किया गया यह सर्वे सरकार का एक नीतिगत फैसला है। इसका सभी राज्यों को समर्थन करना चाहिए। अपने राज्यों में भी कड़ाई से लागूू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान देशद्रोहियों को ढूंढने का अच्छा तरीका है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भी इसे लागूू करने के संबंध में विचार विमर्श करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में भी कई स्थानों पर बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहेे है और उनकी पहचान कर उन्हें वापस अपने देश भेजने की कार्यवाही समय समय पर की जाती रही है। राजस्थान की सीमा से लगते पाकिस्तान के नागरिकों के भी प्रदेश में बसने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वहां से आने वाले अधिकांश नागरिक वैध वीजा के आते है और यदि उनके बारे में भी कोई पुख्ता जानकारी मिली तो उनके खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी।
हिम्मत है इसलिए लागू करने के लिए निकले हैं- अमित शाह
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राज्यसभा में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर पर बयान देते हुए कहा है कि उनकी पार्टी में इसे लागू करने की हिम्मत है। अमित शाह ने कहा कि 1985 में हुए असम समझौते की आत्मा ही एनआरसी है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी सरकार ने ये समझौता तो किया, लेकिन एनआरसी को लागू नहीं किया।
14 अगस्त 1985 को राजीव गांधी ने असम समझौते पर हस्ताक्षर किए और 15 अगस्त को लाल किले से इसकी घोषणा की। क्या था असम समझौते की आत्मा? इस समझौते की आत्मा ही एनआरसी थी। उन्होंने कहा कि समझौते में कहा गया कि अवैध घुसपैठियों को पहचान कर, उनको हमारे सिटीजन रजिस्टर से अलग करके एक शुद्ध नेशनल सिटीजन रजिस्टर बनाया जाएगा। ये पहल कांग्रेस के प्रधानमंत्री ने ही की थी।
उनमें इसे लागू करने की हिम्मत नहीं थी, हममें हिम्मत है इसलिए हम इसे लागू करने के लिए निकले हैं। अमित शाह ने कहा कि इन चालीस लाख लोगों में बांग्लादेशी घुसपैठिए कितने हैं, आप किसे बचाना चाहते हैं, बंग्लादेशी घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं? अमित शाह के इस बयान के बाद सदन में जाेरदार हंगामा हो गया।
एनआरसी का अंतिम मसौदा जारी
असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अंतिम मसौदा 2.89 करोड़ नामों के साथ सोमवार को जारी किया गया, लेकिन इसमें करीब 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। अंतिम मसौदे में कुल 3,29,91,384 आवेदकों में से 2,89,84,677 के नाम शामिल किए गए हैं लेकिन 40,07,707 आवेदकों के नाम छोड़ दिए गए हैं।
अंतिम मसौदे को जारी करने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के महापंजीयक शैलेष ने कहा, 'यह एनआरसी के अंतिम मसौदे के प्रकाशन के रूप में एक मील का पत्थर साबित होगा और यह हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने जोर दिया कि यह केवल अंतिम मसौदा था और सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद समग्र एनआरसी का प्रकाशन किया जाएगा।
वंचित लोग कर सकेंगे आवेदन
शैलेष ने कहा कि जिन लोगों को उनके नाम नहीं मिलते हैं, वे 30 अगस्त से 28 सितंबर के बीच आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सात अगस्त से, जिनके नाम छोड़े गए हैं, वे एनआरसी सेवा केंद्रों पर जाकर नाम नहीं जुडऩे के कारण पता कर सकेंगे और स्थानीय रजिस्ट्रार से पूछ सकेंगे।
उन्होंने कहा, 'कोई भी व्यक्ति जो दावों और आपत्तियों के नतीजे से संतुष्ट नहीं है वह विदेशी मामलों से संबंधित न्यायाधिकरण के सामने अपील दायर कर सकता है। आरजीआई ने पूर्ण एनआरसी के प्रकाशन के लिए समय सीमा देने से इनकार कर दिया क्योंकि दावा केवल दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने के बाद के चरण से ही संभव होगा।