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राजस्थान में पहली बार एक साथ गरजेंगे असदुद्दीन ओवैसी और हनुमान बेनीवाल, जानें RLP-AIMIM के ‘शक्ति प्रदर्शन’ में क्या ख़ास?

जयपुर नगर निगम चुनाव 2026: भट्टा बस्ती में ओवैसी और बेनीवाल की संयुक्त महारैली। AIMIM-RLP के 'जाट-मुस्लिम' गठबंधन ने बढ़ाई कांग्रेस-भाजपा की चिंता।
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MP Hanuman Beniwal with MP Asaduddin Owaisi - File PIC

जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 की हलचलों के बीच राजधानी में आज 6 सितंबर (रविवार) को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल एक साथ एक ही मंच पर विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। शाम 6:15 बजे से शुरू होकर रात 10:00 बजे तक चलने वाले इस संयुक्त शक्ति प्रदर्शन का मकसद जयपुर नगर निगम चुनाव में AIMIM और RLP के उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल तैयार करना है।

इस चुनावी रैली के आयोजन के साथ ही जयपुर के चुनावी दंगल में तीसरे मोर्चे का आधिकारिक शंखनाद होने जा रहा है। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष जमील खान के अनुसार, ओवैसी और बेनीवाल की यह ऐतिहासिक जनसभा जयपुर के मुस्लिम और युवा बहुल इलाकों में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू करने जा रही है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने लंबे समय से जयपुर नगर निगम की सत्ता में काबिज रहने वाली दोनों पारंपरिक पार्टियों—भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस—के रणनीतिकारों को अपनी गणित फिर से बैठाने पर मजबूर कर दिया है।

जाट-मुस्लिम 'सोशल इंजीनियरिंग': जानिए क्यों खास है RLP-AIMIM गठबंधन

राजस्थान की पारंपरिक राजनीति हमेशा से भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस बार नगर निगम चुनाव 2026 में 'ओवैसी + बेनीवाल' की जोड़ी ने एक नया सोशल समीकरण तैयार कर दिया है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का राजस्थान की जाट बेल्ट, किसानों और युवाओं के बीच काफी गहरा प्रभाव और मजबूत जनाधार माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM जयपुर के परकोटे, हवामहल और आसपास के मुस्लिम बहुल इलाकों में अपने पैर तेजी से पसार रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह 'जाट + मुस्लिम' सोशल इंजीनियरिंग धरातल पर वोटों में तब्दील होती है, तो जयपुर के दर्जनों वार्डों में सीधे तौर पर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगेगी। वहीं कुछ शहरी वार्डों में जहां कांटे की टक्कर है, वहां यह गठबंधन भाजपा के विजय रथ को भी रोक सकता है। दोनों ही नेताओं ने इस जनसभा को "हक, इंसाफ और विकास की लड़ाई" करार देते हुए जनता से एक मजबूत और ईमानदार विकल्प चुनने की अपील की है।

प्रत्याशियों के बीच शह-मात का खेल

हवामहल विधानसभा क्षेत्र के वार्ड इस समय पूरे जयपुर नगर निगम चुनाव का सबसे हॉटस्पॉट बन गया है। इसमें AIMIM के प्रत्याशी हैं, जिनके पक्ष में खुद असदुद्दीन ओवैसी और हनुमान बेनीवाल वोट मांगने आ रहे हैं। स्थानीय मतदाताओं के बीच सड़क, सीवर, सफाई और विकास कार्यों में भेदभाव को लेकर लंबे समय से असंतोष देखा जा रहा है।

हालांकि, चुनाव प्रचार के बीच AIMIM को आधिकारिक चुनाव चिन्ह 'पतंग' न मिलने के कारण पार्टी प्रत्याशी निर्दलीय प्रतीक चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में हैं। इसके बावजूद ओवैसी और बेनीवाल की संयुक्त मौजूदगी कार्यकर्ताओं में जबर्दस्त उत्साह भर रही है।

वहीं दूसरी ओर, भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही इस क्षेत्र में अपने दिग्गज स्थानीय नेताओं को उतारकर वोटों के बिखराव को रोकने की पूरी तैयारी कर रखी है।

सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम

भट्टा बस्ती थाना क्षेत्र के 90 फीट चौराहा एक बेहद व्यस्त और घना बसा हुआ इलाका है। रविवार शाम को आयोजित होने वाली इस विशाल रैली में हजारों की संख्या में समर्थकों और आम जनता के जुटने की संभावना है। स्थिति की संवेदनशीलता और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जयपुर पुलिस प्रशासन की तरफ से अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

क्षेत्र में जगह-जगह पुलिस बल की तैनातगी की गई है और यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए वैकल्पिक रूट डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी ताकि रैली शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हो सके।

क्या पड़ेगा इस रैली का असर?

जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में हो रहे इस चुनावी महासमर में अब तक मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही देखा जा रहा था। लेकिन 6 सितंबर की यह जनसभा पूरे जयपुर शहर में तीसरे मोर्चे की मजबूती का एक बड़ा संदेश देने जा रही है।

यदि यह गठबंधन मुस्लिम और जाट मतदाताओं को एकजुट करने में सफल रहता है, तो इसका असर केवल हवामहल ही नहीं बल्कि किशनपोल, आदर्श नगर और झोटवाड़ा जैसे विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले नगर निगम वार्डों पर भी सीधा दिखाई देगा। अब देखना यह होगा कि 6 सितंबर की शाम का यह राजनीतिक जमावड़ा जयपुर नगर निगम 2026 के अंतिम नतीजों में क्या नया मोड़ लाता है।

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