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राजस्थान निकाय चुनाव: सभी 10 निगम जीतने के लिए BJP अपना रही ‘महाराष्ट्र मॉडल’, जानें क्या है यह पूरा प्लान?

राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा ने सभी 10 नगर निगमों में जीत के लिए महाराष्ट्र मॉडल अपनाया है। पार्टी ने चुनाव को लेकर खास रणनीति और माइक्रो मैनेजमेंट तैयार किया है।
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जयपुर

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Harshita Saini

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भवनेश गुप्ता

Sep 06, 2026

bjp maharashtra model nikay chunav

राजस्थान निकाय चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनाया महराष्ट्र मॉडल

जयपुर. राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने इस बार ऐसा चुनावी प्रयोग किया है, जिसकी झलक अब तक मुख्य रूप से विधानसभा और लोकसभा चुनावों में ही देखने को मिलती रही है। पार्टी ने प्रदेश के सभी 10 नगर निगमों को एक साथ जीतने के लक्ष्य के साथ 'महाराष्ट्र मॉडल' की तर्ज पर चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट तैयार किया है। इसके तहत महाराष्ट्र के करीब 20 विधायक-विधान परिषद सदस्य और बड़े नेताओं को अलग-अलग निगमों की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि इनके साथ करीब 25-25 विशेषज्ञों की टीमें भी मैदान में उतारी गई हैं। इस पूरी रणनीति की कमान महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को दी गई है।

क्र. सं.नगर निगमकुल वार्ड
1जयपुर150
2जोधपुर100
3कोटा100
4अजमेर80
5बीकानेर80
6उदयपुर80
7भीलवाड़ा70
8भरतपुर65
9अलवर65
10पाली65
कुल10 नगर निगम855

60 लाख से ज्यादा मतदाताओं पर रहेगी नजर

भाजपा ने राजस्थान के जिन दस नगर निगमों को इस बार अपने सबसे बड़े चुनावी टारगेट में शामिल किया है, उनमें कुल 855 वार्ड आते हैं। इन दसों नगर निगम क्षेत्रों में 60 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। खास बात यह है कि इन निगमों के 855 वार्ड प्रदेश में मौजूद कुल वार्डों का करीब 9 प्रतिशत हिस्सा हैं।

यही आंकड़ा भाजपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का आकलन है कि अगर इन दस नगर निगमों में मजबूत प्रदर्शन कर जीत हासिल की जाती है, तो इसका राजनीतिक असर और संदेश छोटे निकायों में जीत की तुलना में कई गुना बड़ा होगा। इसी वजह से भाजपा ने इन निगमों को अपने प्रमुख चुनावी लक्ष्य के तौर पर रखा है।

यह महाराष्ट्र मॉडल

इस मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मतदाता तक बार-बार पहुंच बनाना है। हर निगम के लिए अलग मिशन और अलग कमांड सिस्टम तैयार किया गया है। स्थानीय संगठन की रिपोर्ट के साथ बाहर से आई टीम का स्वतंत्र जमीनी फीडबैक सिस्टम तैयार किया गया। सभाओं से ज्यादा घर-घर पहुंच का टारगेट, मतदाताओं का फीडबैक और मौके की स्थिति के आधार पर तत्काल रणनीति बदलने की प्लानिंग।

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