
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग के कारण 15 छात्र-छात्राओं की मौत के दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी का सीधा असर अब राजस्थान की राजधानी जयपुर की कोचिंग इंडस्ट्री और छात्र सुरक्षा नीति पर भी देखने को मिल रहा है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस संवेदनशील विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक आधिकारिक पत्र लिखा है।
अशोक गहलोत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की गई विस्तृत जानकारी के माध्यम से राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि जयपुर में भी वर्तमान समय में कई कोचिंग संस्थान संकरे, असुरक्षित और तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण भवनों में संचालित हो रहे हैं। यदि समय रहते इन पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो जयपुर में भी लखनऊ जैसा कोई बड़ा और अनहोनी हादसा घटित हो सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिखा कि लखनऊ के कोचिंग संस्थान में भीषण अग्निकांड में 15 निर्दोष विद्यार्थियों की मृत्यु होना अत्यंत दुखद और विचलित करने वाला है। इसी घटनाक्रम के मद्देनजर उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर सीधे तौर पर आगाह किया है।
गहलोत ने लिखा कि जयपुर के कई इलाकों में चल रहे कोचिंग सेंटरों के पास न तो उचित आपातकालीन निकास व्यवस्था है और न ही वहां पर्याप्त मात्रा में अग्निशमन उपकरण लगाए गए हैं। ऐसे असुरक्षित परिसरों में हजारों छात्र अपनी जान जोखिम में डालकर प्रतिदिन पढ़ाई करने आते हैं, जो कि प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी लापरवाही है।
अपने पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जयपुर के प्रताप नगर में बनाए गए महत्वाकांक्षी 'Coaching Hub' प्रोजेक्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए इस प्रोजेक्ट को रोकने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की।
अशोक गहलोत ने अपने बयान में निम्नलिखित मुख्य बातें उठाईं:
140 कोचिंग संचालकों की प्रक्रिया: कांग्रेस सरकार के समय जयपुर के यातायात और सुरक्षा को व्यवस्थित करने के लिए प्रताप नगर में एक सर्वसुविधाजनक कोचिंग हब का निर्माण किया गया था, जहां लगभग 140 बड़े कोचिंग संचालकों ने शिफ्ट होने की कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
भाजपा सरकार द्वारा रोक का आरोप: गहलोत का आरोप है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद वर्तमान भाजपा सरकार ने कोचिंग संस्थानों को वहां शिफ्ट करने की इस पूरी योजना को बीच में ही रोक दिया है।
IIT जोधपुर को जमीन देने का विरोध: उन्होंने दावा किया कि सरकार अब इस निर्मित सुरक्षित कैंपस को IIT जोधपुर को सौंपने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जो कि मूल योजना के सिद्धांतों के विपरीत है।
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पुरजोर मांग की है कि इस कोचिंग हब कैंपस को IIT जोधपुर को सौंपने के निर्णय को राज्य सरकार तुरंत प्रभाव से वापस ले। इसके स्थान पर जयपुर के संकरे और रिहायशी इलाकों में चल रहे कोचिंग संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर अविलंब इस सुरक्षित कैंपस में स्थानांतरित किया जाए ताकि छात्रों का जीवन सुरक्षित हो सके।
लखनऊ की घटना से सबक लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहकर राज्य सरकार के समक्ष एक ठोस प्रशासनिक ढांचागत मांग भी रखी है। उन्होंने मांग की है कि जयपुर शहर के भीतर संचालित होने वाले प्रत्येक छोटे-बड़े कोचिंग सेंटर का स्थानीय नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम के माध्यम से तत्काल प्रभाव से एक सघन 'अग्निशमन एवं भवन सुरक्षा ऑडिट' करवाया जाए।
इस ऑडिट के तहत जो भी संस्थान सुरक्षा मानकों, जैसे फॉयर एनओसी, वेंटिलेशन और चौड़े रास्तों के नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएं, उन्हें तुरंत प्रभाव से नोटिस देकर तब तक बंद किया जाए जब तक वे सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दुरुस्त नहीं कर लेते। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।