
Reshu Gupta
"मैंने बहुत मिन्नतें कीं, पर वो नहीं पसीजे, और खौलता पानी फेंककर ताउम्र का दर्द दे गए...''। असहनीय दर्द और पीड़ा झेल रही रेशु गुप्ता इतना कहते ही रोने लगती है। ना चाहकर भी वो उस खौफनाक दिन को याद करते हुए सिसक उठती है। गहरे मानसिक सदमे से जूझ रही रेशु गुप्ता ने 'पत्रिका' से बातचीत में अपना ये दर्द साझा किया है। उसने बताया कि वो हर दिन की तरह 19 जून की शाम को अपना फूड कार्ट लगा रही थी। इसी दौरान अचानक कुछ पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और मुख्यमंत्री के काफिले की सुरक्षा व वीआईपी रूट का हवाला देते हुए जबरन हमारे फ़ूड कार्ट को हटाने लग गए।
रेशु गुप्ता ने बताया, ''हमने पुलिसकर्मियों को बहुत रोका। उनसे हाथ जोड़कर, मिन्नतें करते हुए कार्ट खुद हटा लेने की बात कही। ये भी कहा कि कार्ट पर रखे बर्तन में खौलता गर्म पानी है। लेकिन उन्होंने चंद मिनटों की मोहलत तक नहीं दी और मेरी बातों को अनसुना करते हुए जबरन कार्ट को धक्का दिया जिससे बर्तन पर रखा खौलता पानी सीधे मेरे शरीर पर आकर गिरा। मेरे हाथ, छाती और पेट का ज़्यादातर हिस्सा बुरी तरह झुलस गया है। दर्द के मारे असहनीय पीड़ा होती है।''
रेशु ने रोते हुए कहा, "मुख्यमंत्री की सुरक्षा के नाम पर आम जनता और अपनी रोजी-रोटी कमाने वाली लड़कियों पर इस तरह जानलेवा हमला करना कहां का न्याय है? दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए।"
जब रेशु गुप्ता खौलते पानी से झुलसकर सड़क पर चीखने-चिल्लाने लगी, तो पास ही मौजूद उसकी सगी बहन खुशबू गुप्ता तुरंत अपनी बहन को बचाने और बीच-बचाव करने के लिए दौड़ी। खुशबू ने जब पुलिसकर्मियों की इस हरकत का विरोध किया। आरोप है कि मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उसके साथ भी सरेआम बदसलूकी और गाली-गलौज की।
बहन खुशबू ने भी 'पत्रिका' को बताया कि घटना होने के फ़ौरन बाद आरोपी पुलिसकर्मी पालक झपकते ही वहां से रवाना हो गए। यही नहीं, सीएम सिक्योरिटी के काफिले में शामिल कुछ पुलिसकर्मी भी वहां रुके, लेकिन बिना मदद किए वो भी वहां से रवाना हो गए। जैसे-तैसे बहन रेशु को अस्पताल पहुँचाया। फिलहाल उसे घर पर ही उपचार दिया जा रहा है।
हैरानी की बात ये है कि जगतपुरा महल रोड पर बीते 19 जून को वीआईपी सुरक्षा के नाम पर युवती से बर्बरता की खौफनाक घटना को आज 4 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक आरोपी पुलिसकर्मियों पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है। पीड़ित परिवार को का आरोप है कि रामनगरिया थाने में नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बावजूद दोषी पुलिसकर्मियों पर अब तक कोई ठोस विभागीय या कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा और गंभीर पहलू यह है कि घटना में आरोपी पक्ष में भी पुलिसकर्मी हैं और उसकी जांच पड़ताल करने वाले भी पुलिस ही हैं। ये हादसा 19 जून की शाम को हुआ था। पीड़िता की शिकायत पर रामनगरिया थाना पुलिस ने मामला दर्ज कराया गया, लेकिन आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ किसी भी तरह की प्राथमिक विभागीय कार्रवाई या निलंबन की कोई सूचना नहीं आई है।
स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार आरोप लगाते हुए आशंका जता रही है कि है कि पुलिस अपनी ही बिरादरी के दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। एक तरफ जहां सरकार महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जयपुर की सड़कों पर आत्मसम्मान के साथ रोजगार चलाने वाली बेटियों के साथ खुद कानून के रखवाले इस तरह का जानलेवा और बर्बर व्यवहार कर रहे हैं।
रामनगरिया पुलिस थाने के एसएचओ चन्द्रभान सिंह ने बताया कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान पुलिस टीम रोड क्लियर करवा रही थी। कुछ फ़ूड कार्ट सड़क पर खड़े थे, जिन्हें हटाने की बात पर कार्ट वाले लोगों से बहस हुई थी। एफआईआर के आधार पर जांच जारी है।
Updated on:
23 Jun 2026 03:30 pm
Published on:
23 Jun 2026 02:54 pm
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