
मां और प्रिंस की फाइल फोटो: पत्रिका
जयपुर के झोटवाड़ा स्थित महाराणा प्रताप स्कूल में छात्र प्रिंस सोनी की मौत मामले में न्याय की मांग को लेकर शुक्रवार शाम कैंडल मार्च निकाला। पीड़ित परिजन, संयुक्त अभिभावक संघ और स्वर्णकार समाज के लोगों ने मार्च निकालकर प्रिंस को न्याय दिलाने, स्कूल प्रशासन की कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इससे पहले एक गार्डन में श्रद्धांजलि सभा भी हुई।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि 3 दिन में जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। प्रिंस की मां निर्मला देवी ने भावुक होकर कहा कि बच्चा अब उनके बीच नहीं है, लेकिन परिवार चाहता है कि उसकी मौत का सच सामने आए। पिता अमित सोनी ने भी कहा कि परिवार को किसी से बदला नहीं चाहिए, उन्हें सिर्फ बेटे के लिए न्याय चाहिए।
प्रिंस की मां निर्मला देवी ने आरोप लगाया कि स्कूल से करीब 50 मीटर की दूरी पर अस्पताल था, फिर भी स्टॉफ बच्चे को अस्पताल नहीं लेकर गए। परिजनों को फोन कर बोला कि 4 पहिया वाहन लेकर आइए, बच्चा बेहोश हो गया है और अस्पताल ले जाना पड़ेगा। घबराती हुई स्कूल पहुंची तो प्रिंस के होंठ नीले पड़ गए थे और वह टीचर्स से जीने की गुहार लगा रहा था। लेकिन उसकी बात नहीं सुनी और अस्पताल नहीं लेकर गए।
मां ने कहा-हम उसे अस्पताल लेकर गए तो डॉक्टर ने कहा कि अगर बच्चे को करीब आधे घंटे पहले लाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। उनका आरोप है कि प्रिंस कई बार बताता था कि लंच लेट करने पर टीचर के गुस्सा हो जाते हैं और डांटते हैं तो वह इस डर से जल्दी-जल्दी पेटीज खा रहा होगा।
प्रिंस के दोस्त ने एक निजी न्यूज चैनल को बताया कि वह उसके पास आया और बोला-भाई चल, पेटीज खाते हैं। दोस्त के अनुसार, पेटीज के दो निवाले खाने के बाद प्रिंस के गले में कुछ अटक गया। पानी पीने के बाद उसे चक्कर आने लगे। इसके बाद उसे स्टॉफ रूम में लेटाया गया और घर पर फोन किया।
दोस्त का आरोप है कि करीब 1 घंटे तक प्रिंस को वहीं रखा। उसकी सांस लेने में परेशानी हो रही थी, होंठ नीले पड़ गए थे और मुंह से झाग निकल रहा था। CPR देने के लिए कहने पर स्टॉफ ने कथित तौर पर कहा कि वे डॉक्टर नहीं हैं। दोस्त ने बताया कि इससे पहले प्रिंस बिल्कुल ठीक था और उन्होंने साथ में खाना भी खाया था। उसने आधी पेटीज फेंक दी थी और आरोप लगाया कि पेटीज से बदबू भी आ रही थी। दोस्त का कहना है कि अगर उसे समय पर अस्पताल भेज दिया जाता तो शायद वह जिंदा होता। उसने यह भी बताया कि स्कूल में मेडिकल रूम नहीं है।
पोस्टमॉर्टम के बाद भी पुलिस अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। एसीपी (जयपुर के झोटवाड़ा) शिव कुमार भारद्वाज ने बताया कि चिकित्सकों ने नमूने जांच के लिए एफएसएल भेजे हैं। स्कूल प्रशासन, स्टॉफ और मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही जांच की आगे की दिशा तय होगी। शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को झोटवाड़ा सीबीईओ को जांच की जिम्मेदारी दी है। स्कूल में भी लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया।
Updated on:
15 Aug 2026 10:29 am
Published on:
15 Aug 2026 10:29 am
