
Rajasthan BJP Independence Day Programme at Badi Choupar
जयपुर स्थित बड़ी चौपड़ पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित भारतीय जनता पार्टी के ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान एक अनपेक्षित विवाद सामने आया है। समारोह में तिरंगा फहराने के बाद जब राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' बजाने की बारी आई, तब साउंड सिस्टम पर उसका मूल स्वरूप बजने के बजाय एक गलत धुन बज गई। इस तकनीकी और मानवीय चूक के कारण मंच पर मौजूद सभी नेता और कार्यकर्ता असहज हो गए। देखते ही देखते इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हो गया।
राष्ट्रीय पर्व के इस मंच पर राष्ट्रगीत के साथ हुई इस चूक की गंभीरता को समझते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने तुरंत सामने आकर पार्टी की तरफ से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और सार्वजानिक रूप से माफी मांगी।
15 अगस्त की सुबह बड़ी चौपड़ पर भाजपा के पारंपरिक कार्यक्रम में प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने मुख्य मंच से तिरंगा फहराया। ध्वजारोहण के ठीक बाद नियमानुसार राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का गायन होना था।
साउंड ऑपरेटर और साउंड टीम की लापरवाही के कारण 'वंदे मातरम' का प्रामाणिक ऑडियो बजने के बजाय कोई अन्य धुन लाउडस्पीकर पर बज उठी।
राष्ट्रगीत का मूल स्वरूप न बजने से मंच पर मौजूद सांसद मंजू शर्मा, विधायक बालमुकुंद आचार्य और अन्य वरिष्ठ नेता असहज हो गए। आयोजन समिति ने तुरंत ऑडियो को सही करने की कोशिश की, लेकिन तब तक मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया कैमरों में यह घटना कैद हो चुकी थी।
घटना होते ही मदन राठौड़ ने बिना किसी देरी के मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी और पार्टी की ओर से गहरा खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'यह आयोजन की व्यवस्था संभालने वाली टीम की ओर से हुई एक गंभीर तकनीकी और मानवीय चूक थी। एक जिम्मेदार पद पर होने के नाते मैं इस गलती की पूरी नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं। राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का सम्मान हमारे लिए सर्वोपरि है, और इस गलती के लिए मैं जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगता हूं।'
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पर्व के ऐसे अवसरों पर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के प्रोटोकॉल का पालन हर स्थिति में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
जयपुर का बड़ी चौपड़ क्षेत्र भारतीय लोकतंत्र और आजादी के इतिहास का एक बेहद अनूठा गवाह रहा है। आजादी के समय यानी 15 अगस्त 1947 से ही बड़ी चौपड़ पर हर राष्ट्रीय पर्व पर खुले चौक में आम जनता के बीच ध्वजारोहण की परंपरा चली आ रही है।
यहां एक छोर पर राज्य के मुख्यमंत्री और सत्ताधारी दल के नेता तिरंगा फहराते हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के प्रमुख नेता अपना मंच सजाकर ध्वजारोहण करते हैं। इस कार्यक्रम में किसी वीआईपी सुरक्षा के बिना शहर के आम नागरिक, व्यापारी और सभी दलों के कार्यकर्ता एक साथ शामिल होते हैं।
Updated on:
15 Aug 2026 12:25 pm
Published on:
15 Aug 2026 12:13 pm
