Labour Day : कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर सभी मेहनतकश श्रमिक भाई-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर अशोक गहलोत ने कई मुद्दों पर मीडिया से बात की।
Labour Day : कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर देश के नवनिर्माण में अपना पसीना बहाने वाले सभी मेहनतकश श्रमिक भाई-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। श्रम ही राष्ट्र की असली शक्ति है। आज समय की मांग है कि श्रमिकों को न केवल सम्मान मिले, बल्कि उनकी आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। इसके लिए न्यूनतम आय में वृद्धि और मनरेगा को और अधिक सशक्त बनाना अनिवार्य है।
हमारी सरकार ने मनरेगा की तर्ज पर 'शहरी रोजगार गारंटी योजना' शुरू कर श्रमिकों को संबल प्रदान किया था। अब समय आ गया है कि राहुल गांधी जी की न्यूनतम आय योजना (NYAY) को धरातल पर उतारा जाए, ताकि हर श्रमिक की आय में वास्तविक वृद्धि हो और उनके जीवन में एक ठोस, सकारात्मक बदलाव आ सके।
कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने मजदूर दिवस के मौके पर मीडिया से अपने विचार साझा किए। अशोक गहलोत ने कहाकि आज अंतरराष्ट्रीय मई दिवस है, मजदूरों का दिवस है और इसीलिए कहा गया था उस जमाने के अंदर दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ। आज उसके बावजूद भी जो हालात हैं, बहुत गंभीर हैं। जो मजदूरी है, जो न्यूनतम मजदूरी होती है वो भी मजदूरों को नहीं मिल पा रही है। ये बहुत ही अनफॉर्चुनेट बात है।
अशोक गहलोत ने कहा नोएडा में आप ने देखा कि तमाशा कितना बड़ा हो गया। किस प्रकार से लोग सड़कों पर आ गए यह सरकार को एक वार्निंग है कि वो अपने आप के अंदर कि किस प्रकार से मजदूरों का ख्याल रखें। मालिक की ड्यूटी है कि वो अपने मजदूरों का ख्याल रखें। नैतिक रूप से खुद की जिम्मेवारी बनती है। उसके अभाव के अंदर यह स्थिति बनती है। पूरे मुल्क में बहुत चिंताजनक स्थिति है।
अशोक गहलोत ने कहा राजस्थान की तो स्थिति और खराब है। देश में मजदूरी में सबसे नीचे जो राज्य उसमें राजस्थान का नाम आता है। ये बहुत ही अनफॉर्चुनेट है। मैंने कल ही मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखा है कि आपको मजदूरी बढ़ाना चाहिए। मेरा मानना है कि प्रदेश के अंदर राजस्थान में मजदूरों, श्रमिकों के अंदर, शांति, प्यार, मोहब्बत, भाईचारा बना रहे।
अशोक गहलोत ने कहा कि इवेन पूरे देश के अंदर सिर्फ राजस्थान ने गिग वर्कर्स का कानून पास किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के एक संवाददाता ने लिखा कि यह कानून हिंदुस्तान में हर राज्य में बनना चाहिए और दुनिया के मुल्कों में बनना चाहिए तो आप सोच सकते हो। राजस्थान की कांग्रेस सरकार थी उसकी पहल को देश और दुनिया में पहचान मिली थी। दुर्भाग्य से सरकार बदल गई और इन्होंने उस कानून को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ना नियम बनाए, ना उनकी रक्षा कर रहे, रोज अखबार में आता है उनकी स्थिति क्या है। आज भी आया होगा। राजस्थान के अंदर स्थिति बहुत गंभीर है। उस पर ध्यान देना चाहिए।
सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ितों से आज होने वाली मुलाकात पर अशोक गहलोत ने कहा कि सिलिकोसिस बीमारी की स्थिति बहुत ही नाजुक है। वहां पर माइनिंग मालिक की जिम्मेदारी है कि वो मजदूरों को उनके प्रोटेक्शन के लिए पाबंद करें। मास्क लगाना है या आजकल अन्य तरह के कई उपकरण भी आ गए। कई तरह की गाइडलाइन आ गई है। जो मजदूर उनको फॉलो करें, उसी को वहां पर रखें।
मजदूर खुद भी कभी गलती करता है। वह लापरवाही करता है। क्या फर्क पड़ेगा मास्क नहीं लगाऊं तो, जब बीमारी हो जाती है उसके बाद में उसका मरना निश्चित है। उसको ऑक्सीजन पर रखना पड़ता है, उसके मुंह पर ऑक्सीजन की पाइपलाइन लगती है और वह जब तक जिंदा रहता है, घरवाले तड़पते रहते हैं। आखिर में जान चली जाती है और मरना भी बड़ा मुश्किल है। उसके अंदर क्योंकि बगैर ऑक्सीजन के तो वह सांस ले नहीं पाता है। पूरे फेफड़े खराब हो जाते हैं।
राजस्थान और देश में भी पहले इस बीमारी को टीबी की बीमारी समझ कर इलाज किया जाता था। राजस्थान सरकार ने पहल कर बताया कि यह बीमारी सिलिकोसिस बीमारी है। हमारी सरकार जब जब आई हमने पैकेज दिए और ₹5 लाख मिलते हैं। पर ₹5 लाख से क्या हो, जिंदगी चली गई। पर यह बीमारी हुई क्यों किसी को? मेन बात यह है।
इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि राजस्थान सरकार को चाहिए इन तमाम बातों पर ध्यान दें। मैं गया था सिकंदरा के अंदर एक गांव के अंदर, डेढ़ सौ महिलाएं वहां पर थी, और मैंने हाथ खड़े करवाएं, सब विधवाएं थी। आज जिस गांव में जा रहा हूं, भरतपुर के अंदर, वहां भी कहते हैं कि कितनी विधवाएं हो गई है कोई सोच नहीं सकता। क्या बीतती होगी उनके परिवार पर? आप खुद अंदाजा कर सकते हो कि एक महिला वो विधवा हो जाए, उसके घर में क्या बीतती होगी।
तो इस प्रकार से मैं चाहता हूं यह सिलिकोसिस बीमारी का भी इश्यू बने राजस्थान के अंदर, सरकार आगे आए क्योंकि जहां जहां माइनिंग हो रही है वहां सभी जगह लगभग यह स्थिति बनी हुई है। इसलिए मैंने तय किया कि जहां जहां यह सिलिकोसिस की शिकायत आएगी, मैं खुद भी कई जगह जाऊंगा, लोगों को जागृत भी करेंगे और सरकार पर दबाव बनाए रखेंगे।
जातिगत जनगणना की घोषणा की लेकिन कोई दिशा-निर्देश अभी तक नहीं आया इस पर अशोक गहलोत ने कहा कि अब यह तो देखो यह जो चार तारीख के परिणाम आने दो, उसके बाद में यह क्या फैसले करते हैं देखेंगे।
एग्जिट पोल को लेकर पूछे गए सवाल पर अशोक गहलोत ने कहा कि एग्जिट पोल पर कोई विश्वास करता नहीं है। कभी सच भी होते हैं, कभी असत्य हो जाते हैं। कोई दम नहीं है।