
ग्राफिक्स फोटो पत्रिका
Banswara News : बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ क्षेत्र में रोजगार का प्रमुख साधन रही मनरेगा योजना के कार्य पूरी तरह ठप पड़ जाने से ग्राम पंचायतों में ताले जैसे हालात बन गए हैं। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से लंबित भुगतानों को लेकर जनप्रतिनिधियों एवं श्रमिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा योजना के स्थान पर नई योजना लागू करने की घोषणा के बावजूद अब तक इसका धरातल पर क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। पंचायत समिति सज्जनगढ़ की 38 ग्राम पंचायतों में पिछले करीब 6 माह से एक भी नया कार्य स्वीकृत नहीं हुआ है, जिससे हजारों श्रमिकों के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। रोजगार के अभाव में परिवारों के भरण-पोषण की स्थिति अत्यंत विकट हो गई है।
मजबूरी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रमिक गुजरात की ओर पलायन कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि जिला प्रशासन स्थिति से अवगत होने के बावजूद रोजगार उपलब्ध कराने में उदासीन बना हुआ है।
मनरेगा के अंतर्गत पूर्व में स्वीकृत कार्य पूर्ण होने के बाद भी मेट, कारीगर एवं सामग्री मद के भुगतान पिछले 1 से 2 वर्षों से लंबित हैं। पंचायतों द्वारा बिल लंबे समय पहले ऑनलाइन प्रस्तुत किए जा चुके हैं, लेकिन भुगतान का अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। करोड़ों रुपये की देनदारियां बकाया होने से जनप्रतिनिधियों को भी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। रोजगार ठप होने का असर स्थानीय बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है, जहां मंदी के हालात बन रहे हैं।
भारतीय आदिवासी पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष मानसिंह डामोर ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर आदिवासी क्षेत्रों के विकास को प्रभावित कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो पार्टी श्रमिकों एवं व्यापारियों के हित में आंदोलन की रणनीति बनाएगी।
इधर, पंचायत समिति के विकास अधिकारी ने बताया कि नई योजना के तहत कार्यों की स्वीकृति सरकार की गाइडलाइन आने के बाद ही संभव होगी। लंबित भुगतान के संबंध में उन्होंने कहा कि जैसे ही केंद्र सरकार से राशि प्राप्त होगी, मेट एवं कारीगरों का भुगतान कर दिया जाएगा।
Updated on:
13 Apr 2026 11:31 am
Published on:
13 Apr 2026 11:31 am
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