
Air India Plane Crash One year : बांसवाड़ा. परिवार के साथ डॉक्टर दंपती (मृतक) फाइल फोटो। डाॅ. दंपती का घर, बुजुर्ग माता-पिता फिलहाल अहमदाबाद में। फोटो पत्रिका
Air India Plane Crash One year : अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने को आज एक वर्ष पूरे हो गए हैं। अहमदाबाद एयर इंडिया हादसे में राजस्थान के 13 लोगों की मौत हुई थी। इस हादसे में बांसवाड़ा के डॉ. प्रतीक जोशी दम्पती व तीन बच्चों की भी जान चली गई थी। एक साल बीत गया है पर आज भी उस हादसे को याद कर परिजन व शहरवासी सहम उठते हैं।
साल बीत गया, मगर अहमदाबाद के उस दिल दहलाने वाले विमान हादसे का दर्द अब भी हर किसी को महसूस होता है। उस पीड़ा को बांसवाड़ा ने भी सहा। यहां जन्मे और पले-बढ़े डॉक्टर प्रतीक जोशी, उनकी पत्नी और तीन बच्चों की जिन्दगी खत्म हो गई थी, जिसकी बुरी यादें जेहन से जा नहीं रहीं। हादसे ने कई जिंदगियों को ऐसे जख्म दिए, जो वक्त के किसी भी मोड़ पर भर नहीं पाएंगे।
हादसे के बाद से ही बांसवाड़ा की मोहन कॉलोनी की पांच नम्बर गली में सन्नाटा पसरा है। आस-पड़ोस के लोग बताते हैं कि अब बुजुर्ग माता-पिता बुझे-बुझे, खामोश और दर्द में डूबे से रहते हैं। हादसे की तारीख पास आने के कुछ दिन पहले ही वे अहमदाबाद चले गए। इस हादसे ने उन्हें इतना अधिक तोड़ दिया है कि अब वे किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करते।
डॉ. प्रतीक जोशी दंपती के रिश्तेदार, आस-पड़ोस के लोग व शहरवासी भी हादसे का जिक्र करते ही मौन हो जाते हैं। बोलते-बोलते उनका गला रुंध जाता है और कहते हैं वह बुरा दिन जीवनभर याद रहेगा। भगवान ऐसा किसी के साथ नहीं करें। पड़ोसी बताते हैं- हमारे सामने ही प्रतीक पला-बढ़ा। वह बहुत ही मिलनसार था। उसकी यादें अब भी ताजा हैं।
लंदन में बच्चों को पढ़ाने का सपना संजोए निकले डॉक्टर दंपती को अंदाजा भी नहीं था कि खुशी से हो रही रवानगी, उन्हें आखिरी सफर पर ले जा रही थी। इस परिवार से जुड़े रहे लोगों को अब भी लगता है कि वह एक बुरा ख्वाब था और अभी टूट जाएगा।
12 जून, 2025 से कुछ दिन पहले डॉ. प्रतीक अपने परिवार को लंदन ले जाने के लिए भारत आए थे। तीनों बच्चों की उदयपुर में चल रही पढ़ाई छुड़वाकर उनका दाखिला लंदन के स्कूल में कराने जा रहे थे। परिजनों के अनुसार डॉ. प्रतीक ने 12वीं तक शिक्षा बांसवाड़ा शहर में ही पूरी की थी।
डॉ. जेपी जोशी और डॉ. अनिता जोशी स्वयं चिकित्सा पेशे से जुड़े रहे हैं। उनके पुत्र डॉ. प्रतीक जोशी, पुत्रवधु डॉ. कौमी व्यास अपने तीन बच्चों मिराया, प्रद्युत एवं नकुल हादसाग्रस्त विमान में सवार थे। यह परिवार लंदन जा रहा था।
इस हादसे में चमत्कारिक रूप से जीवित बचने वाले ब्रिटिश नागरिक विश्वाश कुमार रमेश आज भी शारीरिक और मानसिक आघात से जूझ रहे हैं। हादसे में उनके छोटे भाई अजय की मौत हो गई थी।
इस वर्ष अप्रैल में करीब 15 परिवारों ने मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत संबंधित एजेंसियों को पत्र लिखकर कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) का डेटा सार्वजनिक करने की मांग की थी। उनका कहना है कि हादसे की असली वजह सामने आएगी तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।
एयर इंडिया के अनुसार मृतकों के 96 प्रतिशत परिवारों को 25 लाख रुपए की अंतरिम सहायता और 91 प्रतिशत परिवारों को एक करोड़ रुपए की अनुग्रह राशि दी जा चुकी है। कंपनी का कहना है कि शेष मामलों में दस्तावेजी प्रक्रियाएं अधूरी हैं या पारिवारिक विवाद चल रहे हैं।
Published on:
12 Jun 2026 07:00 am
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