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खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए भजनलाल सरकार का फैसला, सफल रहा पायलट प्रोजेक्ट तो पूरे राजस्थान में होगा लागू

Rajasthan Fertilizer Distribution System: सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजसमंद और सिरोही जिलों में यूनिक फार्मर आइडी आधारित खाद वितरण का कार्य शुरू कर दिया है। प्रयोग सफल रहा तो अन्य जिलों में इसी व्यवस्था से खाद वितरण होगा।

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Rajasthan Fertilizer Distribution System

सीएम भजनलाल व खाद के लिए लगी किसानों की भीड़। फोटो: पत्रिका

बांसवाड़ा। खाद की कालाबाजारी को रोकने के लिए राजस्थान सरकार खाद वितरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने जा रही है। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजसमंद और सिरोही जिलों में यूनिक फार्मर आइडी आधारित खाद वितरण का कार्य शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के आला अधिकारी इस व्यवस्था पर निगाह रखे हुए हैं। संबंधित जिलों के अधिकारियों से समस्या व सुझाव लिए जा रहे हैं। प्रयोग सफल रहा तो अन्य जिलों में इसी व्यवस्था से खाद वितरण होगा।

वर्तमान में राजस्थान में प्रति वर्ष लगभग 28 लाख मैट्रिक टन यूरिया और 8 लाख मैट्रिक टन डीएपी की खपत हो रही है। ऐसे में डिजिटल खाद आवंटन प्रणाली लागू होने से बड़े पैमाने पर पारदर्शिता आएगी और कालाबाजारी थमने के साथ ही रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग पर भी अंकुश लगेगा। मोबाइल से बुकिंग, पोश मशीन से वितरण कृषि विभाग के अनुसार यूनिक फार्मर आइडी से लिंक खाद वितरण में पूरी व्यवस्था डिजिटल होगी।

किसान मोबाइल से खाद की दुकान की आइडी डालकर बुकिंग कर सकेंगे। इसमें बुकिंग के बाद मोबाइल पर ओटीपी आएगा, जिसे दर्ज करने के बाद किसान के पास खाद लेने की कनफर्मेशन आएगी यह बुकिंग 48 घंटे तक मान्य होगी। बुकिंग के बाद जमीन की उपलब्धता के अनुसार किसान को पोश मशीन के माध्यम से खाद का वितरण किया जाएगा।

जमीन का डिजिटल डाटा 90 प्रतिशत तैयार

केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक योजना में किसानों की जमीन को आधार से लिंक कर एकीकृत डिजिटल पहचान यानि यूनिक फार्मर आइडी तैयार की गई है। यह काम 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसमें जमीनों के आधार से लिंक होने के बाद भूमि संबंधी डिजिटल डाटा सरकार के पास उपलब्ध है। यह आइडी पीएम किसान सम्मान निधि से भी लिंक है।

जितनी आवश्यकता, उतनी मिलेगी खाद

सिरोही व राजसमंद में यूनिक फार्मर आइडी से खाद वितरण हो रहा है। प्रदेश स्तर पर योजना की समीक्षा हो रही है। समस्या व सुझाव पूछे जा रहे हैं। कम शिक्षित किसानों को थोड़ी परेशानी आ रही है, इसे लेकर भी चर्चा हुई है। जल्द ही अन्य जिलों में यह प्रोजेक्ट लागू होगा।
-शंकरलाल मीणा, ज्वॉइंट डायरेक्टर, सिरोही

प्रोजेक्ट को लेकर हो रही बैठकें

दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। इसे लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं। प्रोजेक्ट पर सरकार की निगाहें हैं, प्रयोग सफल रहा तो यूनिक फार्मर आइडी से खाद का वितरण होगा। इससे कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा और खाद की मारामारी भी नहीं रहेगी।
-केसी मीणा, संयुक्त निदेशक, कृषि बांसवाड़ा

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