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Sheetal Meena Death Case: परिजनों का आरोप- छुट्टी के दिन भी शीतल को ऑफिस बुलाता था मनोज मीणा

दौसा जिले के सिकराय में कनिष्ठ लेखाकार शीतल मीणा की संदिग्ध मौत के मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने उपकोष कार्यालय और पुरानी तहसील के बाहर से बादाम शेक व कुल्फी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं।

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दौसा

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Anil Prajapat

Jun 13, 2026

Sheetal Meena Death Case-1

बादाम शेक व कुल्फी के सैंपल लेती खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम व मृतका शीतल। फोटो: पत्रिका

दौसा। दौसा जिले के सिकराय में कनिष्ठ लेखाकार शीतल मीणा की संदिग्ध मौत के मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने उपकोष कार्यालय और पुरानी तहसील के बाहर से बादाम शेक व कुल्फी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी महेश सैनी और प्रकाश सैनी ने बताया कि लिए गए सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और अन्य तथ्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

इधर, दौसा जिला कोषाधिकारी रामचरण मीना उप कोष कार्यालय पहुंचे और कर्मचारियों से घटनाक्रम की जानकारी ली। मृतका के परिजनों ने अधिकारियों को बताया कि उपकोष अधिकारी मनोज मीणा छुट्टियों में भी शीतल को कार्यालय बुलाते थे और काम का दबाव बनाते थे। परिजनों के आरोपों के आधार पर पुलिस भी मोबाइल कॉल डिटेल, कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस चर्चित प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

उल्लेखनीय है कि दौसा जिले के सिकराय उपखंड स्थित उपकोष कार्यालय में कार्यरत कनिष्ठ लेखाकार शीतल मीणा की बुधवार को संदिग्ध परिस्थितियों में तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें पहले उप जिला अस्पताल और बाद में जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई शीतल के भाई मोहनलाल मीणा ने मानपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए उपकोष अधिकारी मनोज मीणा एवं कार्यालय के कुछ कर्मचारियों पर प्रताड़ना तथा किसी पेय पदार्थ में विषैले पदार्थ की आशंका जताई थी। पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है।

बता दें कि शीतल मीणा की जनवरी 2025 में नौकरी लगी थी और वह सिकराय उपखंड स्थित उपकोष कार्यालय में कार्यरत थी। शीतल मीणा की अभी शादी नहीं हुई थी। कार्यालय से घर भी मात्र 2 किलोमीटर की दूरी के करीब है। वह कैलाई गांव की रहने वाली थी।

प्रारंभिक जांच में शीतल की मौत विषाक्त से होने की पुष्टि

उपकोष अधिकारी मनोज मीणा का कहना था कि 10 जून की शाम करीब 5 बजे ड्यूटी के दौरान अचानक शीतल की तबीयत बिगड़ी थी। यह सब उस वक्त हुआ था जब उच्च अधिकारियों की ओर से कार्यालय का निरीक्षण किया जाना था और निरीक्षण टीम भी कार्यालय में मौजूद थे। इस दौरान शीतल मोबाइल पर किसी से बातचीत कर रही थी। लेकिन, कुछ देर बाद तबीयत बिगड़ी और कार्यालय की सीढ़ियों पर आकर बैठ गई।

पेट दर्द की शिकायत पर स्टाफ ने उसे तत्काल उप जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां पर शीतल मीणा के इलाज के दौरान उल्टियां होने पर उसमें से आई दुर्गंध के आधार पर डॉक्टरों ने जहरीला पदार्थ खाने का अंदेशा जताया। साथ ही गंभीर स्थिति को देखते हुए जयपुर रैफर कर दिया था। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में शीतल मीणा की मौत विषाक्त से होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, पुलिस अभी पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

कार्यालय में मिला था शीतल का टूटा हुआ मोबाइल

पुलिस व स्टाफ ने बताया था कि घटना वाले दिन शीतल मीणा किसी कार्य से गीजगढ़ गई थी। गीजगढ़ से वापस कार्यालय लौटने के बाद वह कार्यालय में मौजूद थीं। इसी दौरान शाम करीब 5 से 5:30 बजे के बीच उल्टियां होने लगीं। मौके पर मृतका का टूटा हुआ मोबाइल फोन कार्यालय की टेबल पर पड़ा मिला, जबकि स्कूटी भी पूरी रात कार्यालय परिसर में ही खड़ी रही। जिसे अहम सबूत माना जा रहा है।