जयपुर

कोरोना से जंग: अब भीलवाड़ा कर रहा है सर्वे के दौरान मिले जुकाम पीड़ितों की स्क्रीनिंग

जयपुर. कोरोना से जंग जीतकर पूरे देश की नजरों में आए भीलवाड़ा में अब उन 16 हजार लोगों पर नजर रखी जा रही है जिन्हें घर—घर सर्वे के दौरान सामान्य सर्दी—जुकाम से पीड़ित पाया गया था। इनमें से जिन लोगों की जुकाम—खांसी ठीक नहीं हुई है, अब उनकी स्क्रीनिंग की जा रही है और संदिग्धों को कोरोना जांच के लिए भीलवाड़ा लाया जा रहा है।

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Apr 09, 2020
कोरोना से जंग: अब भीलवाड़ा कर रहा है सर्वे के दौरान मिले जुकाम पीड़ितों की स्क्रीनिंग
कोरोना से जंग: अब भीलवाड़ा कर रहा है सर्वे के दौरान मिले जुकाम पीड़ितों की स्क्रीनिंग

पिछले महीने भीलवाड़ा में 27 मरीज कोरोना संक्रमण से ग्रसित हो गये तो भीलवाड़ा को बारूद के ढेर पर बैठा होने की घोषणा कर दी गई। इस पर यहां कोरोना के प्रसार को रोकने के लिये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भीलवाड़ा के हालात पर जिला कलेक्टर राजेंद्र भट्ट से चर्चा कर कर्फ्यू लगाने की स्वीकृति दी और जिले की सभी सीमाओं को सील करने के निर्देश दिए। शुरू में जिले के 25 लाख लोगों को घरों में क़ैद रखना एक मुश्किल काम लग रहा था पर भयभीत लोगों ने स्वप्रेरणा से घरों में अपने आपको बंद कर लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के साथ जयपुर में उच्चस्तरीय अधिकारियों के समन्वय और निर्देश से सरकारी मशीनरी ने प्रदेश के पहले कोरोना के मुख्य केंद्र को पूरे देश के लिए अनुकरणीय उदाहरण में तब्दील कर दिया। वर्तमान में 27 संक्रमित मरीजों में से 17 पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं और लोगों के मन से महामारी और मौत का डर निकल चुका है। भीलवाड़ा में कोरोना संक्रमण का मुख्य केंद्र शहर का बृजेश बांगड़ मेमोरियल अस्पताल था, लेकिन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों और पड़ौसी जिलों पर इसका असर होना निश्चित था। अस्पताल में इलाज के लिए एक माह में आए पाँच हजार से अधिक रोगियों और उनके सम्पर्क में आने वालों की पहचान करना करीब असंभव कार्य था। जिला कलक्टर राजेंद्र भट्ट ने ग्राम स्तर पर सर्वे के लिए अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन राकेश कुमार को कमान सौंपी। सिर्फ सात दिन में जिले में 22 लाख से अधिक लोगों का सर्वे कर लिया गया। सर्वे से प्रशासन के सामने जिले की स्वास्थ्य सम्बन्धी एक स्पष्ट तस्वीर उभर कर आई। प्रदेश में बांगड़ अस्पताल के डॉक्टर्स एवं नर्सिंग स्टाफ के संक्रमित होने की पुष्टि होने से भीलवाड़ा अचानक एक हॉट स्पाट के रुप में सामने आ गया था। सबसे बड़ी समस्या संक्रमितों के निकट सम्पर्क की पहचान और उनकी सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करना थी। संक्रमण को कम्यूनिटी संक्रमण में बदलने से रोकने के लिए लगातार लिये गये त्वरित निर्णय मील के पत्थर साबित हुए। चिकित्सा विभाग के माध्यम से शहरी सीमा में सर्वे कर लोगों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी हासिल की जा रही थी तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रा में जमीनी स्तर की मशीनरी को इसके लिए उपयोग में लाया गया। इसके लिए राजस्व, ग्रामीण विकास व पंचायती राज, शिक्षा, कृषि, चिकित्सा आदि विभाग के सबसे निचले स्तर के तीन-तीन कार्मिकों की 1948 टीम बनाई गई। करीब छह हजार लोगों को एक साथ फील्ड में झौंक कर सात दिन के भीतर जिले के पूरे ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वे कर लिया गया। यह इतना आसान नहीं था।
जमीनी स्तर पर हुए सर्वे की रिपोर्ट उपखंड स्तर से होकर उसी दिन जिला स्तर तक पहुंचाना होता था। अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन की कोर टीम रात को तीन बजे तक आंकड़े संग्रहण का कार्य करती थी। त्वरित डाटा संग्रहण के परिणामस्वरूप प्रशासन को अगले निर्णय लेने में काफी आसानी रही। पहले चरण के सर्वे में 16 हजार से अधिक ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई जो सामान्य सर्दी-जुकाम से पीड़ित थे। इन्हे घर में ही रहते हुए सोशल डिस्टेंस की पालना करने और स्वच्छता की आदतें अपनाने की सलाह दी गई। दूसरे चरण में इन्ही लोगों पर फोकस किया गया। जिन्हें अभी भी सर्दी-जुकाम की शिकायत थी, उनका मेडिकल स्क्रीनिंग करवाया जा रहा है। इनमें से संदिग्धों को भीलवाड़ा मुख्यालय पर कोरोना की जांच के लिए लाया जा रहा है। जिले में अभी तक लिए गए करीब ढाई हजार से ज्यादा नमूने में अधिकांश ये लोग शामिल हैं।

Published on:
09 Apr 2020 09:16 pm