जयपुर

Rajasthan Nikay Chunav: वोटिंग के बाद बदल गया BJP का आकलन, इन 4 नगर निगमों को लेकर बढ़ गई टेंशन

नगरीय निकाय चुनाव के दोनों चरणों का मतदान पूरा होते ही भाजपा का चुनावी विश्लेषण तंत्र सक्रिय हो गया। कई निकायों में मतदान प्रतिशत उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने से पार्टी की चिंता बढ़ गई, खासकर नगर निगमों को लेकर।
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Sep 12, 2026
Rajasthan bjp
Rajasthan bjp (Patrika File Photo)

जयपुर। नगरीय निकाय चुनाव के दोनों चरणों का मतदान पूरा होते ही भाजपा का चुनावी विश्लेषण तंत्र सक्रिय हो गया। कई निकायों में मतदान प्रतिशत उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने से पार्टी की चिंता बढ़ गई, खासकर नगर निगमों को लेकर। जिन दस नगर निगमों में भाजपा पहले एक तरफा बढ़त और आसानी से बोर्ड बनाने का दावा कर रही थी, उनमें अब कुछ जगह मुकाबला कांटे का हो सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीकानेर, अजमेर और भरतपुर में पार्टी को बोर्ड बनाने के लिए 'मेहनत' करनी पड़ सकती है, जबकि पाली में भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं मानी जा रही।

उधर, राजस्थान में मतदान खत्म होने से पहले ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ जयपुर पहुंच गए और प्रदेश भाजपा कार्यालय में चुनावी आकलन में जुट गए। देर रात तक संगठन के नेताओं और अलग-अलग स्तर पर लगाए गए पदाधिकारियों से फीडबैक लिया जाता रहा। चुनाव से पहले भाजपा ने 309 नगरीय निकायों में से करीब 209 में बोर्ड बनाने का आकलन किया था।

70 निकायों को डांवाडोल श्रेणी में रखा

करीब 70 निकायों को डांवाडोल श्रेणी में रखा गया था। भरतपुर नगर निगम को लेकर भाजपा ने अपने स्तर पर रणनीति तेज कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के भरोसेमंद पदाधिकारियों को यहां के चुनावी समीकरणों पर नजर रखने को कहा गया है। बीकानेर और अजमेर में भी इसी तरह की तैयारी है।

जयपुर में भी आकलन बदला

राजधानी में भी भाजपा के शुरुआती अनुमान के मुकाबले सीटों की संख्या कुछ कम रहने की आशंका है। हालांकि यहां पार्टी अभी भी बोर्ड बनाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है। वहीं जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अलवर में भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बताई जा रही है।

कांग्रेसः फीडबैक शुरू, नजर वोट शेयर पर

उधर, प्रदेश कांग्रेस ने निकायवार फीडबैक जुटाना शुरू कर दिया। पार्टी ने अभी यह दावा नहीं किया है कि कितने निकायों में उसके बोर्ड बनेंगे, लेकिन शुरुआती आकलन में सत्ताधारी भाजपा के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत बताई जा रही है। दावा है कि कई निगमों में भी पार्टी की स्थिति बेहतर है। हालांकि कांग्रेस का मुख्य फोकस प्रदेश में उसे मिलने वाले वोट प्रतिशत पर है। पार्टी इस चुनाव के मतदान प्रतिशत और अपने वोट शेयर को 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से अहम संकेतक मान रही है।