
जयपुर। ऑनलाइन मौत के खेल पर भले ही केंद्र सरकार ने रोक लगा दी हो, लेकिन उसकी जद में बच्चे अभी आ रहे है। राजधानी जयपुर में इस गेम के शिकार एक बच्चे का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक दसवीं कक्षा का छात्र भी इस ब्लूव्हेल गेम की गिरफ्तमें आ गया और खुद को मिटाने के लिए उसके दिए गए टॉस्क पूरे करने लगा। हालांकि वह अपनी जान से हाथ धोता उससे पहले ही पुलिस और परिजनों ने मिलकर मुंबई में उसे बचा लिया।
पुलिस उपायुक्त अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि ब्लू व्हेल गेम का शिकार छात्र राहुल बागड़ा है। वह 21 अगस्त को मीणावाला में सिरसी रोड कनकपुरा स्थित अपने घर से चला गया था। उसकी लोकेशन ट्रेस की गई तो उसी दिन वह करीब डेढ़ बजे सवाई माधोपुर में रणथंभौर की पहाडि़यों पर था। ऑनलाइन गेम में पहाड़ी पर चढऩा भी उसकी तलाश के लिए पूछताछ की गई तो पता चला कि वह ऑनलाइन गेम ब्लूव्हेल की चपेट में है। राहुल के फोन की लोकेशन एक जगह से नहीं आ रही थी, जिसके कारण पुलिस उसको तलाश में भटकती रही।
सातवें लेवल छोडऩा होता है घर
जानकारी के अनुसार ब्लू व्हेल गेम खेलने वाले को सातवे लेवल पर घर छोडऩे का टॉस्क दिया जाता है। इसके बाद जैसे लेवल बढ़ता है रिस्क भी उतनी ही बढ़ती जाती है। 25वें लेवल पर खेलने वाले को दुनिया से अलविदा कहना होता है वह भी मौत की नई स्टाइल में। राहुल के पास को मुंबई के चर्चगेट से पुलिस ने पकड़ा, उसके पास एक चाकू भी बरामद हुआ है। जो उसने मुंबई में ही खरीदा है।
बच्चों की हरकतों पर नजर
विद्यालयों में भी बच्चों के असामान्य व्यवहार को नजरअंदाज नही करना चाहिए एवं चैक करना चाहिए, बच्चा एकान्त में नही जा रहा हो एवं हाथ, चेहरे, गर्दन पर असामान्य निशान नही बना रहा हो। इस गेम के चलते भारत मे बहुत से बच्चों द्वारा विभिन्न तरीकों से आत्म हत्या की जा चुकी है।