
गुढ़ाचंद्रजी. जीतकीपुर गांव स्थित पठान बाबा मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव से क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
कथावाचक आचार्य स्वामी प्रकाश ने प्रवचन देते हुए कहा कि सुपात्र को श्रद्धा और निष्काम भाव से दिया गया दान कभी निष्फल नहीं होता। धर्म, संयम और आत्मसाधना के मार्ग पर अग्रसर साधु-संतों की सेवा तथा उन्हें श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया दान अनंत पुण्य प्रदान करता है। ऐसा दान न केवल वर्तमान जीवन को सुख और शांति से भर देता है, बल्कि आत्मा की सद्गति का मार्ग भी प्रशस्त करता है तथा दुर्गति से रक्षा करता है।
उन्होंने कहा कि दान की महत्ता उसकी मात्रा में नहीं, बल्कि दाता की निर्मल श्रद्धा, शुद्ध भावना और सुपात्र के चयन में निहित होती है।
आचार्य ने गृहस्थ जीवन में धन के सदुपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक है, जब उसकी कमाई का एक हिस्सा धर्म, जीवदया, शिक्षा, साधु-संतों की सेवा और जरूरतमंदों के कल्याण में लगाया जाए।
कथा के दौरान आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। इस अवसर पर बाल स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के समापन पर आरती के बाद प्रसादी का वितरण किया गया।
फोटो कैप्शन.
गुढ़ाचंद्रजी. जीतकीपुर में श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दौरान सजाई गई भगवान श्रीकृष्ण की झांकी।
गुढ़ाचंद्रजी. कथा श्रवण करते श्रद्धालु।