जयपुर

नन्हे लेखकों की कलम से: खरगोश और रंग-बिरंगे अंडे

Kids Corner: चित्र देखो कहानी लिखो 78 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (13 मई 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 78 में भेजी गई सराहनीय कहानियां दी जा रही हैं।

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May 20, 2026
किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 78

खुशियां बांटने वाले अंडे

दिव्यांशु सैनी, उम्र- 13 वर्ष
एक बार चिकी नाम का शरारती खरगोश बाग में खेल रहा था। उसे वहां दो खूबसूरत, रंग-बिरंगे और डिजाइन वाले अंडे मिले। तभी एक तितली ने बताया कि ये खुशियां बांटने वाले जादुई अंडे हैं। चिकी ने एक छोटी गाड़ी बनाई और अंडों को लेकर सफर पर निकल पड़ा। रास्ते में उसे गिलहरी, चूहा और उल्लू मिले। सबने मिलकर अंडों को सजाया। चिकी समझ गया कि असली खुशी दोस्तों के साथ चीजें बांटने में है।
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मोटू खरगोश और जादुई अंडे

तन्मय कसेरा, उम्र- 13 वर्ष
गर्मी की एक सुबह चिंटू खरगोश बगीचे में खेल रहा था। तभी एक तितली ने उसे झाड़ियों के पास रखे दो रंग-बिरंगे अंडे दिखाए। चिंटू ने जैसे ही सितारों वाले अंडे को छुआ, उसमें से टॉफियां निकल पड़ीं। दूसरे अंडे से छोटी-छोटी चिड़ियां निकलकर आसमान में उड़ने लगीं। तितली ने बताया कि यह जंगल की परी का तोहफा है। चिंटू ने टॉफियां दोस्तों में बांट दीं और हमेशा सबकी मदद करने की ठान ली।

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खुशियों वाला खरगोश

सनाया सिंह, उम्र- 13 वर्ष
एक सुंदर जंगल में चंचल खरगोश रहता था। एक सुबह उसे बगीचे में दो बड़े रंग-बिरंगे और डिजाइन वाले अंडे मिले। वह सोचने लगा कि ये अंडे कहां से आए। तभी एक रंगीन तितली उसके पास आई। खरगोश खुशी से तितली के पीछे भागने लगा। कुछ देर बाद वह अंडों के पास लौटा तो वे सूरज की रोशनी में चमक रहे थे। खरगोश ने तय किया कि वह हमेशा जंगल और उसके जीवों की रक्षा करेगा।
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टिमटिम खरगोश और उसके अंडे

तनीषा केवट, उम्र- 11 वर्ष
एक सुंदर जंगल में टिमटिम नाम का प्यारा खरगोश रहता था। उसके पास एक बड़ी टोकरी थी, जिसमें बहुत सारे सफेद और रंग-बिरंगे अंडे थे। टिमटिम को अपने अंडों से बहुत लगाव था। उसे उन्हें सजाना अच्छा लगता था। वह घंटों बैठकर रंगों, फूलों के रस और छोटे पत्तों से अंडों पर नए-नए डिजाइन बनाता था। हर रोज वह अंडों को सुनहरे रंग देता और उन्हें फूलों के बीच प्यार से रखता था।
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दयालु खरगोश

दर्षिता मोहता, उम्र- 12 वर्ष
एक सुंदर सुबह जंगल में छोटा खरगोश खेल रहा था। उसे दो रंग-बिरंगे अंडे दिखाई दिए। तभी एक तितली वहां आई और बोली कि ये पक्षियों के अंडे हैं, हमें इनकी रक्षा करनी चाहिए। खरगोश ने तुरंत अंडों को सुरक्षित जगह रख दिया। कुछ दिन बाद तेज हवा चलने लगी तो उसने अंडों को बड़े पत्तों से ढक दिया। पक्षियों ने उसकी दयालुता की प्रशंसा की। खरगोश ने समझा कि दूसरों की मदद करना ही सबसे अच्छा काम है।
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साहसी खरगोश

ध्वनि खंडेलवाल, उम्र- 13 वर्ष
एक दिन छोटा खरगोश बगीचे में खेल रहा था। तभी तेज हवा चलने लगी और उसके रंग-बिरंगे अंडे इधर-उधर लुढ़कने लगे। खरगोश पहले तो डर गया, लेकिन फिर हिम्मत जुटाकर दौड़ा और दोनों अंडों को सुरक्षित जगह पर रख दिया। यह देखकर तितली बोली कि तुम बहुत बहादुर हो! खरगोश मुस्कुराकर बोला कि डरना गलत नहीं है, लेकिन डर के आगे हार मान लेना गलत है।

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प्रकृति की सुंदरता

निधीश कट्टा, उम्र- 08 वर्ष
इस चित्र में एक मासूम सफेद खरगोश बैठा है। उसकी चमकती आंखें और खड़े कान उत्सुकता दर्शाते हैं। ऊपर हवा में एक सुंदर तितली उड़ रही है, जैसे वे खेल रहे हों। पास ही जमीन पर दो आकर्षक ईस्टर अंडे रखे हैं, जिन पर सुंदर कलाकृति है। एक पर पीले सितारे और दूसरे पर रंग-बिरंगी पट्टियां हैं। पीछे हरी-भरी झाड़ियां हैं और नीले आसमान में सफेद बादल तैर रहे हैं।
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छोटा पौधा, बड़ी सीख

हिमांगी गौड़, उम्र- 09 वर्ष
सुबह पार्क में आरव, सिया और कबीर छोटे पौधे लेकर आए। उनके साथ दादी और मां भी थीं। आरव ने गड्ढा खोदा, सिया ने पौधा रखा और कबीर ने मिट्टी डाली। दादी ने कहा कि पौधे लगाना आसान है, लेकिन संभालना असली जिम्मेदारी है। सिया के पूछने पर दादी ने बताया कि पौधे को भी पानी, धूप और प्यार चाहिए। दिन बीतते गए और वह छोटा पौधा एक हरा-भरा पेड़ बन गया।
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खुशियों वाले अंडे

जैनब खान, उम्र- 11 वर्ष
एक जंगल में छोटे खरगोश को घूमना बहुत पसंद था। एक दिन खेलते हुए उसे पेड़ों के पास दो सुंदर और चमकदार रंग-बिरंगे अंडे दिखाई दिए। तभी एक तितली आई और बोली कि ये जादुई अंडे हैं, जो इन्हें प्यार से संभालता है, उसे खुशियां मिलती हैं। खरगोश ने अंडों को उठाया तो उनसे चमकदार रोशनी निकलने लगी। पूरा जंगल सुंदर रंगों से भर गया। खरगोश ने सीखा कि खुशियां बांटने से बढ़ती हैं।
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खरगोश की गलती

सिया चौधरी, उम्र- 09 वर्ष
एक जंगल में एक खरगोश रहता था। उसके पास दो रंग-बिरंगे अंडे थे। एक दिन वह अपने अंडों की रखवाली कर रहा था। तभी वहां एक तितली आई। खरगोश अंडों को छोड़कर उस तितली को देखने लगा और इसी बीच उसका अंडा गिरकर टूट गया। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हम जो भी काम कर रहे हैं, हमारा पूरा ध्यान उसी काम पर होना चाहिए।
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प्रकृति का जादू

जय भारत, उम्र- 12 वर्ष
आसमान बादलों से ढका था। हरी घास पर एक सफेद खरगोश बैठा था। तभी एक रंग-बिरंगी तितली उसके पास मंडराने लगी। खरगोश अपने सामने रखे दो सुंदर अंडों को देख रहा था। तितली बोली कि ये जादुई अंडे हैं, जो इन्हें सच्चे मन से संभालेगा, उसके जीवन में खुशियां आएंगी। खरगोश ने उन्हें रख लिया। तभी बारिश शुरू हुई और सूरज की किरणें अंडों पर पड़ीं, जिससे वे चमक उठे।
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बनी और जादुई परी

कुणाल राय, उम्र- 10 वर्ष
एक जंगल में बनी नाम का शरारती खरगोश रहता था। उसे झाड़ियों में दो बड़े चमकीले अंडे मिले। तभी एक लाल तितली आई। बनी समझ गया कि तितली अंडों की रक्षक है और उसने पहरा देना शुरू किया। शाम को एक अंडे से परी बाहर आई और बोली कि तुमने मेरी रक्षा की है, तुम्हें क्या चाहिए? बनी ने ढेर सारी गाजर मांगी। परी ने गाजर दी और आसमान में उड़ गई।
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खरगोश के अंडे का कमाल

दुर्गेश नंदिनी साहू, उम्र- 12 वर्ष
एक जंगल में एक खरगोश रहता था। उसे रंग-बिरंगे अंडों से खेलना पसंद था। एक दिन जंगल में खाने की कमी पड़ गई तो खरगोश ने अपना बचा हुआ खाना उन अंडों में डालकर सभी को दे दिया। कुछ दिनों बाद खरगोश को एक आदमी ने पकड़ लिया, लेकिन तभी सारे जानवर उसकी मदद के लिए आ गए और आदमी भाग गया। इस कहानी से सीख मिलती है कि एकता किसी को भी हरा सकती है।
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चतुर खरगोश और अहंकारी शेर

भवानी प्रताप, उम्र- 11 वर्ष
एक घने जंगल में भासुरक नाम का क्रूर शेर रहता था। वह जानवरों को बेवजह मार देता था। परेशान जानवरों ने प्रस्ताव रखा कि हम हर दिन आपकी सेवा में एक जानवर भेजेंगे। शेर मान गया। एक दिन एक छोटे और बुद्धिमान खरगोश की बारी आई। उसने सोचा कि बेकार में मरने से बेहतर है कि मैं अपनी जान बचाने का कोई उपाय निकालुं। उसने अपनी चतुराई से शेर को मात दी।
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छोटा कदम, बड़ी सफलता

धैर्य खंडेलवाल, उम्र- 09 वर्ष
एक छोटे खरगोश को चित्र बनाना पसंद था। उसने साधारण अंडों को रंग-बिरंगा बनाने की सोची। शुरुआत में रंग फैल जाते और चित्र ठीक नहीं बनते, पर उसने हार नहीं मानी। वह रोज अभ्यास करता रहा। धीरे-धीरे उसके बनाए अंडे पूरे जंगल में सबसे सुंदर माने जाने लगे। तितली ने कहा कि तुम्हारी मेहनत चमक रही है। खरगोश बोला कि लगातार मेहनत और धैर्य से हर सपना पूरा किया जा सकता है।
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जादुई टेक्नोलॉजी अंडे

विहान अग्रवाल, उम्र- 07 वर्ष
छुट्टियों में आरव अपनी नानी के गांव गया। वहां सब बच्चे मोबाइल में लगे थे। बगीचे में उसे एक खरगोश मिला, जिसके पास दो रंग-बिरंगे अंडे थे। खरगोश बोला कि ये जादुई टेक्नोलॉजी अंडे हैं। ये तभी चमकते हैं जब बच्चे मोबाइल छोड़कर असली दुनिया में खेलते हैं। मोबाइल से सीखना अच्छा है, लेकिन असली मजा दोस्तों के साथ खेलने में है। आरव ने उस दिन मोबाइल बंद कर दोस्तों के साथ खूब खेला।
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तितली की मदद

हर्षिल गुप्ता, उम्र- 07 वर्ष
एक सुंदर बगीचे में खरगोश रहता था। उसने घास पर दो रंग-बिरंगे अंडे देखे। पास ही एक तितली उदास थी। खरगोश ने पूछा तो तितली बोली कि मुझे इन अंडों की देखभाल करनी है, लेकिन मैं अकेली हुं। खरगोश ने कहा कि चिंता मत करो, मैं तुम्हारी मदद करुंगा। वह अंडों को संभालने लगा। जब बच्चे अंडे लेने आए, तो उन्होंने दोनों को धन्यवाद दिया। जरूरत पड़ने पर हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए।
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खरगोश और रंगीन अंडे

आलिंद अग्रवाल, उम्र- 08 वर्ष
एक दिन छोटा खरगोश चिंटू जंगल में घूम रहा था। तभी उसे घास पर दो सुंदर रंगीन अंडे दिखाई दिए। एक चिड़िया ने बताया कि जंगल में त्योहार होने वाला है और ये सजावट के अंडे हैं। चिंटू ने अंडों को उठाकर मैदान तक पहुंचाने में मदद की। सभी जानवर उसकी मदद देखकर खुश हुए। चिंटू ने सीखा कि दूसरों की मदद करना अच्छी बात है। हमें मिल-जुलकर रहना चाहिए। उस शाम के बाद से चिंटू हमेशा दूसरों के काम आने के लिए तैयार रहने लगा।

Updated on:
20 May 2026 03:42 pm
Published on:
20 May 2026 03:41 pm
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