मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को सदन में घोषणा की कि खेजड़ी संरक्षण के लिए सरकार कानून बनाने जा रही है। कानून का मसौदा तैयार हो रहा है। मसौदा तैयार होते ही सदन में विधेयक लाया जाएगा।
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को सदन में घोषणा की कि खेजड़ी संरक्षण के लिए सरकार कानून बनाने जा रही है। कानून का मसौदा तैयार हो रहा है। मसौदा तैयार होते ही सदन में विधेयक लाया जाएगा। खेजड़ी हमारा कल्पवृक्ष है और पहचान है। इसे राज्यवृक्ष भी घोषित कर रखा है।
राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देते समय सीएम ने कहा कि हम प्रकृति को मां मानकर पूजते हैं। नदी-पहाड़-वृक्ष को पूजते हैं। दो साल में 20 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं और पूरे पांच साल के कार्यकाल में पचास करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। हम सभी को प्रकृति के लिए सामूहिक प्रयास करना होगा।
कार्बन उत्सर्जन रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। राजस्थान में सौर ऊर्जा के कुल उत्पादन का 27 प्रतिशत उत्पादन हो रहा है। हमें विकास भी करना है और विरासत को भी बचाना है।
इसलिए खेजड़ी को बचाने के लिए कानून लाने जा रहे हैं। इस मुद्दे पर मुझसे कुछ समय पहले संत-महात्मा भी मिले थे। उनसे भी मेरी बात हुई थी और आश्वस्त किया था कि खेजड़ी संरक्षण के लिए सरकार काम करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामजल सेतु परियोजना के महत्वपूर्ण घटक नवनेरा बैराज एवं ईसरदा बांध में जल संग्रहण प्रारंभ हो चुका है। साथ ही, बंध बारैठा (भरतपुर) तथा ब्राह्मणी बैराज (चित्तौड़गढ़) के लिए 14 हजार 676 करोड़ रुपए के सहमति पत्र भी जारी किए जा चुके हैं। इस परियोजना में अब तक 26 हजार करोड़ के कार्य धरातल पर शुरू हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यमुना जल समझौते की डीपीआर का कार्य अंतिम चरण में है। पाइपलाइन अलाइन्मेंट का सर्वे पूरा कर प्रस्तावित अलाइनमेंट का फील्ड वैरिफिकेशन भी किया जा चुका है। वहीं, गंगनहर प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए 1 हजार 717 करोड़ रुपए की सौगात दी तथा इंदिरा गांधी नहर के विकास कार्यों के लिए 4 हजार 731 करोड़ के काम शुरू किए हैं।
सीएम शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय वित्तीय कुप्रबंधन ने ऐसा हाल कर दिया था कि खजाना खाली, योजनाएं अधूरी और भरोसा टूटा हुआ था। पिछली सरकार ने हमें विरासत में 5 लाख 79 हजार 781 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था। बडे़ राज्यों की श्रेणी में पंजाब के बाद राजस्थान के ऊपर सर्वाधिक कर्ज था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में हमारी सरकार के आर्थिक प्रबंधन, सामाजिक स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचारों, बेस्ट प्रैक्टिसेज और प्रशासनिक सुधारों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 में जो राजस्व घाटा 38 हजार 954 करोड़ रुपए तक पहुंच गया था उसे 2025-26 के बजट अनुमानों में 31 हजार 9 करोड़ रुपए रहने की संभावना व्यक्त की गई है। हमारी सरकार 2 साल में ही राजस्व घाटे को करीब 8 हजार करोड़ रुपए कम करने में सफल रही है।