जयपुर

पूरा तंत्र किया हाईजैक…फिर अंग प्रत्यारोपण में चले “जैक और चैक”

Human Organ : पैसे लेकर अंग प्रत्यारोपण के लिए एनओसी देने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। नियमों में कमी का फायदा उठाकर भ्रष्टाचार का यह खेल नहीं रचा गया बल्कि सरकारी तंत्र ने नियमों में आमूलचूल बदलाव करके भ्रष्टाचार का यह रास्ता बनाया।
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Apr 11, 2024
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जयपुर. पैसे लेकर अंग प्रत्यारोपण के लिए एनओसी देने केमामले में बड़ा खुलासा हुआ है। नियमों में कमी का फायदा उठाकर भ्रष्टाचार का यह खेल नहीं रचा गया। बल्कि सरकारी तंत्र ने नियमों में आमूलचूल बदलाव करके भ्रष्टाचार का यह रास्ता बनाया। मानव अंग ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम के अनुसार प्रत्यारोपण के लिए सलाहकार समिति और राज्य स्तरीय प्राधिकरण होने चाहिए। समिति और प्राधिकरण की पड़ताल के बाद ही अंग प्रत्यारोपण संभव है। राजस्थान पत्रिका पड़ताल में खेल की परतें खुल गईं। संकेत मिले कि ऊंची सिफारिश या पैसे लेकर अंग प्रत्यारोपण का यह धंधा पिछले 30 महीने से चल रहा है। दरअसल राज्य के चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने 21 अक्टूबर 2021 को एक आदेश निकालकर समिति और प्राधिकरण दोनों को ही भंग कर दिया। अब इनकी जगह एक नई समिति बना दी। इसे सलाहकार सह राज्य स्तरीय समिति का नाम दिया गया। दो की जगह अब एक ही समिति होने से इसकी शक्तियां बढ़ गईं। सभी अधिकार इस एक समिति के पास आ गए। पहले नियमानुसार सलाहकार समिति का अध्यक्ष चिकित्सा सचिव स्तर का अधिकारी अर्थात आईएएस अफसर और दूसरी समिति का अध्यक्ष अस्पताल अधीक्षक होता था। अब एकीकरण करके बनाई नई समिति का अध्यक्ष प्राचार्य स्तर पर ले आए।

पत्रिका पड़ताल में उजागर हुआ कि पहले समिति व प्राधिकरण की नियमित बैठक होती थीं। इसमें पैसों के लेन-देन को भी जांचा जाता था। रिटायर न्यायिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता भी पूछताछ करते थे। पूर्ण संतुष्टि के बाद ही स्वीकृति दी जाती थी। नई समिति के गठन के बाद कोई बैठक नहीं हुई। बिना समिति की स्वीकृति के ही फैसले होने लगे।

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने जिस आदेश से समिति और प्राधिकरण को भंग किया, उसे गायब कर दिया। इस आदेश की प्रति न तो अधिकारियों के पास है और न ही विभाग की वेबसाइट पर है। पत्रिका ने जब विभाग से सवाल किया कि नई समिति क्यों बनाई तो जवाब में 18 अप्रेल 2023 का आदेश थमा दिया। इस आदेश में विभाग के 21 अक्टूबर 2021 के एक आदेश का हवाला देकर दोनों समितियों का एकीकरण कर नई कमेटी गठित करने का उल्लेख है।

चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान का कहना है कि समिति के अध्यक्ष चिकित्सा शिक्षा सचिव होते थे। प्राधिकरण का अध्यक्ष अधीक्षक या प्राचार्य थे। नियम बदलने के पीछे क्या मंशा रही, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता।

Published on:
11 Apr 2024 02:04 pm