विमुक्त, घुमंतू और अर्द्ध-घुमंतू समाजों ने मंगलवार को जयपुर में विधानसभा घेराव किया। समुदाय के लोगों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
राजधानी जयपुर में मंगलवार को विमुक्त, घुमंतू और अर्द्ध-घुमंतू (डीएनटी) समुदायों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। विभिन्न जिलों से आए हजारों लोगों ने विधानसभा की ओर कूच कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और ठोस निर्णय की मांग की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प भी हो गई।
53 डीएनटी समाजों से जुड़े लोग बाईस गोदाम क्षेत्र में एकत्र हुए, जहां से उन्होंने विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राज्य की करीब 15 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 1.23 करोड़ लोग डीएनटी और घुमंतू वर्ग से जुड़े हैं, फिर भी उन्हें मूलभूत सुविधाएं और अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पाए हैं।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका ने बताया कि बालराई आंदोलन के बाद सरकार बातचीत के लिए तैयार हुई थी। पिछले साल दिसंबर महीने में दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई, जिसमें दस सूत्रीय मांगों पर चर्चा की गई, लेकिन उन पर अमल नहीं किया गया। विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्ध-घुमंतू जाति परिषद के प्रदेशाध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डीएनटी समाजों के साथ विश्वासघात किया गया है।
विधानसभा घेराव के दौरान समुदायों ने 10 प्रतिशत पृथक आरक्षण, भूमि व आवास के लिए पट्टे, पंचायत स्तर पर 10 प्रतिशत आरक्षण, आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और स्वर्गीय लक्ष्मणनाथ जोगी को शहीद का दर्जा देने सहित सात प्रमुख मांगें दोहराईं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि बजट सत्र से पहले उनकी मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।