
मांगों के समर्थन में 65 वें दिन भी जारी दिव्यांगों का धरना
—कल होगी सचिवालय में बैठक
—जीएनएम नर्सिंग कोर्स में चयनित दिव्यांगों को पोस्टिंग देने के संबंध में होगी चर्चा
जयपुर
अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठे हुए दिव्यांगों को आज 65 दिन हो गए है। लेकिन अभी तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हो सकी है। दिव्यांगजनों को अब भी उम्मीद है कि सरकार देर ही से सही मगर उनकी मांगों पर कुछ तो सकारात्मक फैसला देगी। दिव्यांगों को कल होने वाली सचिव स्तर की वार्ता का इंतजार है। जिसमें जीएनएम नर्सिंग कोर्स में चयनित दिव्यांगों को पोस्टिंग देने के संबंध में चर्चा होगी। इस बैठक में कार्मिक विभाग, नि:शक्तजन आयोग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे।
यदि दो साल पहले की बात करें तो नि:शक्तजन आंदोलन—2016 के बैनर तले भी दिव्यांगजन 27 दिन के धरने पर बैठे थे। सरकार ने कुछ मांगों पर आश्वासन देकर धरना समाप्त करवाया था लेकिन इस बार सरकार ने पूरी तरह से दिव्यांगों की मांगों को नजर अंदाज कर दिया है। बाइस गोदाम स्थित नि:शक्तजन आयोग के बाहर दिव्यांगों की संख्या रोजाना बढ़ रही है। प्रदेशभर से दिव्यांग यहां धरना स्थल पर पहुंच रहे है। लेकिन विभाग के आला अफसर इनसे मिलने से कतरा रहे है। दिव्यांगों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन देकर अपनी मांग रख रहे है लेकिन जैसे ही दिव्यांग प्रतिनिधी अधिकारियों तक मिलने की पर्ची पहुंचाते है वे व्यस्त होने का बहाना बनाकर टाल रहे है।
विकलांग आंदोलन-2016 संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक रतन लाल बैरवा ने बताया कि आज 65 दिन हो गए धरने पर बैठे हुए। लेकिन सरकार की असंवेदनशीलता देखकर दिव्यांगों की भावनाएं आहत हो रही है। कम से कम सरकार की ओर से कोई तो प्रतिनिधी बात करने आए लेकिन सुनवाई के लिए ना तो कोई आ रहा है और ना ही किसी आला अफसर से मिलने दिया जा रहा है। बैरवा ने कहा कि दो दिन के भीतर यदि सरकार ने दिव्यांगों की नहीं सुनी तो संख्या बल बढ़ाया जाएगा। जिसमें महिलाएं और बच्चे भी धरना स्थल पर बैठेंगे।
प्रमुख मांगे—
—जीएनएम नर्सिंग कोर्स में चयनित दिव्यांगों को मिलें पोस्टिंग —बैकलॉग भर्ती की जाए —उच्च स्तरीय कमेटी की हो मीटिंग —दिव्यांग कोर्ट का हो गठन —दिव्यांग शिक्षकों को अपने गृह क्षेत्र में नियुक्ति दी जाए —रोजगार के लिए कियोस्क का वितरण हो।