
'टेंडर' खुले तो 'पेट' पले
'टेंडर' खुले तो 'पेट' पले
—रोजगार चलाने के लिए दिव्यांगों ने मांगी ट्राई साइकिल
—दिव्यांगों ने कहा— 40 प्रतिशत से अधिक विकलांगता पर मिलें ट्राईसाइकिल
जयपुर
बेबसी और लाचारी झेल रहे दिव्यांगों ने अब पेट पालने के लिए सरकार से गुहार लगाई है। दिव्यांगजन सरकार से रोजगार चलाने के संसाधन मांग रहे है। अपनी विकलांगता प्रतिशत की दुहाई देकर अपनी तरफ सरकार का ध्यान खींच रहे हैं। हालांकि विभाग ने इसमें टेंडर जारी होने और इसके माध्यम से ट्राई साइकिल बांटनी की बात कही है। जबकि दिव्यांगों ने टेंडर की जानकारी नहीं होने की बात कही।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और नि:शक्तजन आयोग में दिव्यांगजनों ने ज्ञापन देकर अपनी इस पीड़ा से राहत दिलाने की मांग की हैं। दिव्यांगों का कहना है कि सरकार यदि अधिक से अधिक लोगों को ट्राई साइकिल उपलब्ध कराती है तो विकलांगजन घर बैठे ही अपना व परिवार का पेट पाल सकेगा। ट्राई साइकिल होगी तो वे थड़ी ठेला लगाकर फैनी, गुटखा, पान या परचूनी की दुकान लगा सकता है। इससे उसे इतनी इनकम तो हो जाएगी जिससे सड़कों पर बैठकर भीख नहीं मांगनी पड़ेगी।
दिव्यांगजन आंदोलन—2016 से जुड़े दिव्यांगों ने इस संबंध में एक मांग पत्र भी तैयार किया है। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि कुछ समय पहले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से दिव्यांगों को ट्राई साइकिल बांटी जाती थी। लेकिन फिर से बंद कर दिया गया। कब किसे साइकिल दी गई। इसकी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाती है।
'ट्राई साइकिल वितरण' योजना—
दिव्यांगजनों के लिए सरकार की ओर से ट्राई साइकिल वितरण योजना चलाई जा रही है। जो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित की जा रही है। विभाग की ओर से प्राइवेट फर्म को टेंडर दिए जाते हैं। ये फर्म ही ट्राइ साईकिल का वितरण करती है।
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इनका कहना है—
— नि:शक्तजन आयुक्त धन्नाराम पुरोहित से मिलकर इस पर चर्चा की जाएगी और 40 प्रतिशत से अधिक विकलांगता वाले दिव्यांगों के लिए ट्राई साइकिल मांगी जाएगी। ट्राई साइकिल मिलती तो है लेकिन कब इस संबंध में जानकारी नहीं है।
रतनलाल बैरवा, प्रदेश संयोजक
विकलांग आंदोलन संघर्ष समिति
Published on:
06 Jun 2018 11:23 am
