नया साल नई शुरुआत का प्रतीक होता है। अगर यह शुरुआत अपने शहर को साफ रखने के संकल्प से हो, तो जयपुर न सिर्फ सुंदर दिखेगा, बल्कि उसकी वैभवता और निखरेगी।
जयपुर. नया साल नई शुरुआत का प्रतीक होता है। अगर यह शुरुआत अपने शहर को साफ रखने के संकल्प से हो, तो जयपुर न सिर्फ सुंदर दिखेगा, बल्कि उसकी वैभवता और निखरेगी। गुलाबी नगर में प्रतिदिन निकलने वाले करीब 1900 टन कचरे के निस्तारण की बड़ी चुनौती से पार पाने को मशीनें हैं, कर्मचारी हैं, प्लांट हैं-बस सही दिशा नहीं है। घर से हूपर तक का गलत रास्ता ही शहर को कचरे के पहाड़ों में बदल रहा है। आइए हम संकल्प लेते हैं...इस रास्ते को जल्द सुधारेंगे और शहर में निरंतर स्वच्छता फूल खिलाएंगे।
कहां चूक रहा है सिस्टम
घर : राजधानी के 95 फीसदी घरों में गीला और सूखा कचरा अलग नहीं किया जा रहा। रसोई का कचरा, प्लास्टिक, कागज और सेनेटरी वेस्ट घरों में ही अलग कर लिया जाए। इससे निस्तारण आसान हो जाता है।
गली : तय समय पर हूपर आएं ताकि लोग जल्दबाजी में खुले में या सड़क किनारे कचरा नहीं फेंकें। इससे खुले में गंदगी नहीं होगी, इससे होने वाली बीमारियों का खतरा भी कम होगा।
हूपर : हूपर में भी कचरा मिला हुआ आता है। कई जगह ओवरलोडिंग होती है, जिससे कचरा गिरता है और सफाई कर्मचारियों को दोबारा मेहनत करनी पड़ती है। यह व्यवस्था बदली जाए।
प्रोसेसिंग प्लांट : अभी प्रोसेसिंग प्लांट में कचरे की दोबारा छंटाई होती है। 40 फीसदी तक कचरा बिना प्रोसेस डंपिंग यार्ड पहुंचता है। प्लांट में अलग-अलग कचरा पहुंचे ताकि उसे खाद में बदलना, रिसाइकिल करना आसान हो।
समाधान घर में
- हरा डिब्बा : गीला कचरा (रसोई का कचरा)
- नीला डिब्बा : सूखा कचरा (प्लास्टिक, कागज, धातु)
- पीला डिब्बा या अन्य : सैनेटरी वेस्ट
विशेषज्ञ मानते हैं कि घर से कचरा वर्गीकरण मॉडल से कचरे गीला कचरा सीधे कम्पोस्ट बनकर खाद में बदला जा सकता है। सूखे को रिसाइकिल कर सकते हैं।
जन सहयोग से निगम उठाए कदम
1. कचरा बाहर नहीं, हूपर में ही: तय समय पर हूपर की घंटी या अनाउंसमेंट, सड़क पर ढेर लगाने की बजाय सही तरीके से कचरा देने पर प्रोत्साहन और एक गली-एक वालंटियर मॉडल से बड़ा बदलाव आ सकता है। नागरिक खुद व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे।
2. माइक्रो कम्पोस्टिंग से डंपिंग यार्ड को राहत: हर वार्ड में 1 से 2 माइक्रो कम्पोस्टिंग यूनिट लगें। होटल, सब्जी मंडी और बड़े अपार्टमेंट का गीला कचरा वहीं प्रोसेस हो। इससे रोजाना 200 से 300 टन कचरा डंपिंग यार्ड जाने से रोका जा सकता है।
नए वर्ष में निगम बनाए एक्शन प्लान
- पहले दिन में 15 दिन में: 100 फीसदी डोर-टू-डोर कलेक्शन की निगरानी, नियम तोड़ने पर नोटिस
- 30 दिन में: टोलियां बनाकर जागरुक लोगों को जागरुक किया जाए।
- 60 दिन में:डंपिंग यार्ड जाने वाला कचरा 20 से 30 फीसदी तक कम किया जाए।
टॉपिक एक्सपर्ट
निगम की सक्रियता भी जरूरी
सबसे पहले हूपर का समय निर्धारित हो तो लोग भी निश्चिंत हों। हेल्पर कचरा बीनने की बजाय कचरा उठाकर डालें। जिन घरों में एक कचरा पात्र मिले, उस घर का कचरा न लें और जुर्माना भी लगाएं। साथ ही लोग भी जागरुक हों कम से कम दो कचरा पात्र रखें। गीले कचरे से खाद बनाएं, पार्कों में निगम कम्पोस्ट मशीनें लगाए। कचरे के जो पहाड़ बन रहे हैं, उनको रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है।
-विवेक.एस.अग्रवाल, एक्सपर्ट, ठोस कचरा प्रबंधन