
मातृ-शिशु कल्याण केंद्रों की व्यवस्था सुधारने के लिए सेवा भाव सबसे अहम है। केंद्रों के व्यवस्थापक और कर्मचारी यदि संवेदनशीलता के साथ कार्य करें, तो व्यवस्थाएं स्वतः सुदृढ़ हो सकती हैं। आने वाली महिलाओं और बच्चों को सम्मानजनक व्यवहार, समय पर उपचार और आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए। सेवा, सुविधा और सहयोग: इन तीन स्तंभों पर केंद्रित प्रयास से ही इन संस्थानों की कार्यप्रणाली बेहतर और भरोसेमंद बन सकती है। - उद्धव जोशी, उज्जैन
मातृ-शिशु केंद्रों की दशा सुधारने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के रिक्त पद तत्काल भरे जाने चाहिए। आधुनिक जांच उपकरण, आवश्यक दवाएं और चौबीसों घंटे बिजली-पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो। एम्बुलेंस सेवाओं का विस्तार तथा स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इन कदमों से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ और शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। - नरेंद्र रलिया, जोधपुर
केंद्रों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति आवश्यक है। 24 घंटे बिजली-पानी, साफ-सफाई और मुफ्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। एम्बुलेंस सेवा को सुदृढ़ कर आपात स्थिति में त्वरित सहायता दी जा सकती है। यदि बुनियादी सुविधाएं मजबूत हों, तो मातृ और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार संभव है। - अंकित नायक, हिम्मतपुरा(टोहाना)
मातृ-शिशु कल्याण केंद्रों में बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन में व्यापक सुधार जरूरी है। लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर को आधुनिक बनाया जाए तथा डॉक्टरों और नर्सों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। नि:शुल्क जांच और दवाओं की सतत आपूर्ति हो। आंगनवाड़ी के माध्यम से पोषण, स्तनपान और स्वच्छता पर जागरूकता बढ़ाई जाए। 24x7 एम्बुलेंस और मजबूत रेफरल नेटवर्क से दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं को समय पर उपचार मिल सकेगा। - प्रवेश भूतड़ा, सूरत
मातृ-शिशु स्वास्थ्य किसी भी देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। केंद्रों में स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, पर्याप्त बेड, प्रसव कक्ष और दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित हो। स्त्रीरोग व बाल रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति के साथ नियमित प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए। गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाए। डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली से प्रत्येक मां और शिशु की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सकती है। - डॉ. दीपिका झंवर, जयपुर
मातृ-शिशु केंद्रों में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना समय की मांग है। प्रशिक्षित महिला चिकित्सकों और नर्सों की पर्याप्त नियुक्ति हो। आवश्यक दवाएं, टीके और पर्याप्त बेड उपलब्ध रहें। अल्ट्रासाउंड मशीन, वार्मर और वेंटिलेटर जैसे उपकरणों की नियमित जांच हो। चौबीसों घंटे एम्बुलेंस तथा बिजली-पानी की निर्बाध आपूर्ति से सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी। - विभा गुप्ता, बेंगलुरु
केंद्रों में सबसे पहला लक्ष्य जच्चा-बच्चा की सुरक्षा होना चाहिए। प्रसव कक्ष और प्रतीक्षा कक्ष की समुचित व्यवस्था हो। बिजली, स्वच्छ पेयजल और साफ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। प्रसव पीड़ा होने पर महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध हों। जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत कर मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। - शिवजी लाल मीना, जयपुर
मातृ-शिशु कल्याण केंद्रों में प्रसव-पूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जन्म के समय कुशल स्वास्थ्यकर्मी की उपस्थिति अनिवार्य हो। पोषण, खाद्य सुरक्षा और टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए। स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को आवश्यक जानकारी दी जाए। सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए समग्र प्रयास किए जाएं, तभी मातृ और शिशु स्वास्थ्य में स्थायी सुधार संभव है। - विजेंद्र कुमार जांगीड़, दौसा
Published on:
24 Feb 2026 03:03 pm
