
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) देश का अहम चिकित्सा संस्थान है, जिस पर देशवासियों को सबसे ज्यादा भरोसा है। कोई भी बीमारी हो, उसका इलाज एम्स में संभव माना जाता है। उपकरण, तकनीक, संसाधनों और कौशल में वह कहीं भी पीछे नहीं रहता। चिकित्सा की हर नवीनतम तकनीक को इस संस्थान ने पारंगतता के साथ अपनाया है। पिछले कुछ दशकों में ऐसी अनगिनत बीमारियों का इलाज यहां संभव हो पाया है, जिनके लिए दूसरे देशों पर निर्भरता थी। अब एम्स में जल्द ही चेहरा प्रत्यारोपण (फेस रिप्लेसमेंट) की सुविधा जुड़ने की उम्मीद जगी है।
अमरीका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के विशेषज्ञों ने दिल्ली एम्स में उनके विशेषज्ञों को इस चिकित्सा पद्धति की तकनीक का प्रशिक्षण दिया है। इन विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि एम्स में कौशल और अवसंरचना की स्थिति उच्चस्तरीय है और इस तकनीक को अपनाने के लिए सर्वथा योग्य है। हार्वर्ड के विशेषज्ञों के इस कथन के बाद अब एम्स में जल्द ही यह सुविधा शुरू होने की संभावनाएं नजर आने लगी हैं। फेस रिप्लेसमेंट सुविधा की अहमियत को इससे समझा जा सकता है कि यह अब तक केवल अमरीका, फ्रांस, स्पेन और तुर्की में ही सुलभ है।
भारत इस सुविधा से सुसज्जित दुनिया का पांचवां या छठा देश कहलाएगा। फेस रिप्लेसमेंट आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की अहम जरूरत है। इसका महत्व एसिड अटैक, किसी अग्नि दुर्घटना या ऐसे ही किसी बड़े हादसे में चेहरा लगभग गंवा देने वाले वे लोग अच्छी तरह जानते हैं, जिन्हें पंद्रह-बीस सर्जरी के बावजूद आराम महसूस नहीं होता या वे अपने चेहरे को मूल स्वरूप में नहीं पाने की वजह से अवसाद से ग्रसित हो जाते हैं। फेस रिप्लेसमेंट उनके लिए कारगर चिकित्सा पद्धति है, जो क्षत-विक्षत चेहरे की दर्द वाली सर्जरी से मुक्ति दिलाने के साथ उन्हें किसी और का ही सही पर सामान्य चेहरा सुलभ करवा सकती है।
ऐसे लोगों की संख्या का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि एम्स में हर साल आठ हजार से ज्यादा लोग इस तरह की सर्जरी के लिए आते हैं। देशभर में चेहरे की सर्जरी के असल जरूरतमंदों की संख्या इससे कई गुना अधिक है। इनमें गिने चुने लोग ही फेस रिप्लेसमेंट सर्जरी, जो कि स्वाभाविक तौर पर बहुत खर्चीली है, के लिए अमरीका-फ्रांस जा पाते हैं। बाकी लोग वित्तीय सीमाओं व अन्य मजबूरियों के चलते बाहर जाकर इलाज करवाने के बारे में सोच भी नहीं पाते। वे जिंदगी को दर्द, पीड़ा और ग्लानि के भाव से जीने के लिए अभिशप्त होते हैं।
ऐसे में एम्स में फेस रिप्लेसमेंट की सुविधा शुरू होना उनके लिए वरदान होगा। कालांतर में देशभर के अस्पतालों में इस सुविधा का प्रसार होगा और वह समय दूर नहीं जब अंग प्रत्यारोपण की तरह फेस रिप्लेसमेंट भी देश में आम होगा। लोगों की तकलीफ दूर करने के साथ यह देश के मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा देने में सहायक होगा।
Published on:
24 Feb 2026 01:23 pm
