
जयपुर। माघ कृष्ण एकादशी पर आज षटतिला एकादशी मनाई जा रही है। श्रद्धालु व्रत रखकर श्री हरि विष्णु की पूजा-अर्चना कर रहे हैं, वहीं गोविंददेवजी, गोपीनाथजी सहित अन्य मंदिरों में ठाकुरजी के विशेष झांकी के दर्शन हो रहे है। गोविंददेवजी मंदिर में मंगला झांकी से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिली। अन्य मंदिरों में ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई गई। ऋतु पुष्पों से श्रृंगार कर विशेष झांकी के दर्शन हुए।
आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में ठाकुर राधा कृष्ण जी को लाल रंग की पोशाक धारण कराकर गोचारण लीला के विशेष स्वर्णाभूषण धारण कराए गए। ठाकुरजी को तिल के व्यंजनों का भोग लगाया गया। सुबह मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन करने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पुरानी बस्ती स्थित मंदिरश्री राधा गोपीनाथजी में ठाकुरजी के गोचारण लीला की झांकी के दर्शन हुए। इस मौके पर मंदिर महंत सिद्धार्थ गोस्वामी के सान्निध्य में षटतिला एकादशी हवन का आयोजन हुआ। इसमें भक्तों ने आहुतियां अर्पित की।
श्याम मंदिर में एकादशी का कीर्तन
पानों का दरीबा स्थित सरस निकुंज में राधा सरस बिहारीजी के फूलों से विशेष शृंगार कर आकर्षक झांकी सजाई गई। इस दौरान एकादशी के पदों का गायन किया गया। इसके अलावा शहर के अन्य मंदिरों में एकादशी पर विशेष आयोजन हो रहे है। वहीं शहर के श्याम मंदिरों में एकादशी कीर्तन हो रहा है। कांवटियों का खुर्रा स्थित प्राचीन श्याम मंदिर में बाबा का विशेष शृंगार कर एकादशी का कीर्तन किया जा रहा है। वहीं भक्त तिल के व्यंजनों का दान भी कर रहे है।
पापहारिणी एकादशी भी
ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी षटतिला या पापहारिणी के नाम से जानी जाती है। यह सब पापों का नाश करने वाली है। इस दिन तिल से बने हुए व्यंजन या तिल से भरा हुआ पात्र दान करने से अंनत पुण्यों की प्राप्ति होती है। षटतिला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य की आध्यात्मिक उन्नति होती है।