
जयपुर. 21 जून को सूर्य को ग्रहण लगेगा. यह आंशिक या खग्रास सूर्यग्रहण होगा जोकि देशभर मेें दिखाई देगा. खगोलविदों के साथ ही ज्योतिषियों के लिए भी सूर्यग्रहण का बहुत महत्व है. धार्मिक और ज्योतिषीय ग्रंथों में सूर्यग्रहण की अवधि में कई कार्य वर्जित किए गए हैं. खास बात तो यह है कि आपकी कुंडली में भी सूर्यग्रहण होता है. इसे ज्योतिष के सबसे बुरे योगों में से एक माना गया है.
ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि जातक की कुंडली में यदि सूर्य और राहू ग्रह एक साथ हों तो इसे जातक के लिए अच्छा नहीं माना जाता है. कुंडली में सूर्य और राहू के योग को ग्रहण दोष के नाम से जाना जाता है. सूर्य जिस भाव में हो उस भाव पर भी अगर राहू की दृष्टि पड़ती है तो भी ग्रहण दोष माना जाता है। कुछ ज्योतिषाचार्य कुंडली में सूर्यग्रहण की इस स्थिति को पितृदोष भी मानते हैं।
कुंडली में यदि सूर्यग्रहण हो अर्थात ग्रहण दोष हो तो जातक के जीवन पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पडता है. ग्रहण दोष के कारण जातक के जीवन में हमेशा अस्थिरता बनी रहती है। घर में कलह बनी रहती है, विवाह और संतान प्राप्ति में देरी होती है, कैरियर में भी असफलता मिलती है। इतना ही नहीं उसे बीमारियां घेर लेती हैं, और उसमें आत्मविश्वास की बेहद कमी रहती हैं। जातक को नजदीकी रिश्तों, पारिवारिक संबंधों में भी कष्ट और धोखा मिलता है।
ग्रहण दोष का प्रभाव कम करने के लिए कुछ उपाय भी ज्योतिषिय ग्रंथों में बताए गए हैं. ज्योतिषार्य पंडित दिनेश शर्मा बताते हैं कि ऐसे लोगों को जीवनभर भगवान शिव की पूजा जरूर करनी चाहिए. ओम नम: शिवाय मंत्र का जितना ज्यादा हो सके उतना जाप करें. प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना भी लाभकारक सिदृध होता है. रोज सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य दें। जातक को नियमित रूप से आदित्यहृदय स्तोत्र का करना चाहिए। रविवार का व्रत रखें और नमक का सेवन न करें। ऐसे जातक को सूर्यग्रहण के दौरान जरूरतमंदों को गेहूं, गुड़ का दान जरूर करना चाहिए। ऐसे लोगों को कभी भी किसी से मुफ्त में कोई चीज नहीं लेनी चाहिए।