
पिछले कई दिनों से तेल—तिलहनों के दाम तेजी से गिर रहे हैं, लेकिन इसके विपरीत मूंगफली के भाव मजबूत बने हुए हैं। इसका कारण मूंगफली की कम पैदावार के बीच निर्यात मांग बढ़ना बताया जा रहा है। मूंगफली की गर्मी के सीजन वाली फसल भी कमजोर हैं। ऐसे में आगे भी मूंगफली बहुत ज्यादा सस्ती होने की संभावना कम है। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि पिछले साल इन दिनों पेराई गुणवत्ता वाली मूंगफली 6500 रुपए बिक रही थी, जो इस साल बढ़कर 8000 रुपए क्विंटल बिक रही है। साल भर में मूंगफली के दाम 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। बीते एक माह के दौरान मूंगफली की कीमतों में 2.5 फीसदी इजाफा हुआ है।
रबी व समर सीजन में मूंगफली उत्पादन में गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक इस सीजन में 14.74 लाख टन मूंगफली का उत्पादन होने का अनुमान है, जो पिछले सीजन के 17 लाख टन से कम है। रबी सीजन में पहले से ही उत्पादन कम था। अब समर सीजन में भी पैदावार घटने से मूंगफली के भाव अन्य तिलहनों की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद मजबूत बने हुए हैं।
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बढ़ रहा है निर्यात
गल्फ देशों और चीन को बड़े पैमाने पर भारत से मूंगफली निर्यात हो रहा है। इसलिए इसके भाव अन्य तिलहनों की कीमतों में 30 फीसदी तक गिरावट के बावजूद मजबूत बने हुए हैं। सरसों, सोयाबीन व सूरजमुखी जैसे तेलों के दाम साल भर में 35 से 50 फीसदी गिर चुके हैं। जबकि, मूंगफली तेल के दाम पिछले साल के बराबर 160 से 165 रुपए लीटर है।