
Rajasthan YEAR ENDER 2019: साल 2019 खत्म होने जा रहा है अगर इस साल ( Health news in hindi ) स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें तो प्रदेश में कुछ अच्छी योजनाएं आई, नए मेडिकल कॉलेज मिले तो वहीं एक तरफ मौसमी बीमारियों कहर बरपाया तो दूसरी और बार बार रेजीडेंट डॉक्टर की हड़ताल को रोकने में सरकार नाकाम रहीं ।
आयुष्मान भारत योजना और भामाशाह योजना मर्ज
आयुष्मान भारत योजना और भामाशाह योजना को मर्ज कर आयुष्मान भारत-महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना' शुरू की। इस योजना के लागू होने से प्रदेश में स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़ गई। लाभार्थियों को और अधिक बीमारियों के इलाज की सुविधा मिल सकेगी। नई योजना के बाद प्रदेश में लाभार्थी परिवारों की संख्या वर्तमान में संचालित भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के लगभग एक करोड़ परिवारों से बढ़कर एक करोड़ 10 लाख से अधिक हो गई।
फ्री दवा योजना में दवाइयों की संख्या बढ़ाई- नि: शुल्क दवा योजना के तहत मिलने वाली दवाइयों की संख्या बढ़ाकर 712 कर दी गई । संख्या बढ़ने पर मरीजों को अब कैंसर, हार्ट एवं किडनी सहित अन्य बीमारियों की दवाइयों भी नि: शुल्क मिल सकेंगी ।
नए मेडिकल कॉलेज मिले-
राजस्थान को 15 नए मेडिकल मिले इस बार मिले । मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ने से राजस्थान में स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार होगा ।
'रक्त संग्रहण एवं परिवहन वाहनों' की शुरुआत-स्वास्थ्य विभाग द्वारा 'रक्त संग्रहण एवं परिवहन वाहनों' शुरूआत हुई। ये रक्तदान संग्रहण के मोबाइल वाहन सातों सम्भाग मुख्यालय जिलों सहित अन्य 7 जिलों में विभिन्न जगह ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित कर स्वेश्चिक रक्त दाताओं का रक्त संग्रहण करने का काम कर रहे हैं।
पहले जनता क्लिनिक की सौगात
प्रदेश की जनता को अपने मोहल्ले अपनी कॉलोनी में स्वास्थ्य सुविधाएं मिले इस उदेश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पहले जनता क्लिनिक की शुरुआत की। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने जगतपुरा स्थित वाल्मीकि कॉलोनी से पहला जनता क्लिनिक राजधानी को समर्पित किया ।
निरोगी राजस्थान योजना की शुरुआत
जयपुर-स्वास्थ्य समस्याओं और उनके निदान के लिए राज्य सरकार की पहली वर्षगांठ के अवसर पर 17 दिसम्बर से राज्यव्यापी निरोगी राजस्थान अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत सरकार जनसंख्या नियंत्रण, जेरियेट्रिक सेंटर, महिला स्वास्थ्य, किशोरी स्वास्थ्य, मौसमी बीमारियों की रोकथाम, टीकाकरण, व्यसन रोग और मिलावट की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाएगी ।
डेंगू और स्वाइन फ्लू ने ली कई जान
मौसमी बीमारियों को रोकने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार पूरी तरह फेल रहीं। इस साल बारिश के मौसम के थमने के साथ शुरू हुआ डेंगू के डंक ने कई लोगों की जान ली वहीं साल की शुरुआत में स्वाइन फ्लू ने प्रदेशभर में 208 लोगों को मौत का ग्रास बनाया। इस साल की बात करें तो नवम्बर महीने तक प्रदेशभर में 12 हजार से अधिक डेंगू पॉजीटिव मरीज सामने आए, वहीं 14 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी थी । डेंगू के साथ प्रदेश में मलेरिया,स्क्रब टाइफस के मरीज भी सामने आए ।
डॉक्टर और कर्मचारी रहे आंदोलनरत
यह साल चिकित्सा के क्षेत्र में कई नई चुनौतियों को दे गया। पिछले कुछ सालों की तुलना में इस साल हड़तालों का दौर रहा। छह बार रेजीडेंट डॉक्टर्स ने हड़ताल जैसा कदम उठाया। पहली बार एसएमएस अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों की जगह बाउंसर्स देखेने को मिले। यही नहीं बल्कि मरीजों के लिए लाइफ लाइन मानी जाने वाली 108 सेवा के कर्मचारियों ने भी कई बार हड़ताल करके लोगों की उलझनों को बढ़ा दिया। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉक्टरों, कर्मचारियों व नर्सिंग स्टाफ ने भी सेवानियम बनाने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनौति दी।